इस्लामाबाद, 1 अक्टूबर 2026 : पाकिस्तान के पूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार-उल-हक काकड़ का एक सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों चर्चा में है। काकड़ ने पाकिस्तान की सभ्यतागत विरासत को हजारों साल पुराना बताते हुए मेहरगढ़, रहमान ढेरी, हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसी पुरातात्विक जगहों का उल्लेख किया है। काकड़ ने दावा किया है कि पाकिस्तान की सभ्यता और संस्कृति की जड़ें 9,000 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं। उनके पोस्ट में 14 अगस्त 1947 को इस प्राचीन राष्ट्र का “राजनीतिक पुनर्जन्म” बताया गया। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। हालांकि, इतिहास के लिहाज से यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है—आज का पाकिस्तान 1947 में अस्तित्व में आया, जबकि उसके वर्तमान भूभाग में मौजूद कई पुरातात्विक स्थल हजारों साल पुराने हैं।
काकड़ ने किन सभ्यताओं का किया जिक्र?
काकड़ ने अपनी पोस्ट में कई प्राचीन स्थलों का उल्लेख किया।
- मेहरगढ़ — बलूचिस्तान क्षेत्र का एक प्राचीन पुरातात्विक स्थल।
- रहमान ढेरी — वर्तमान पाकिस्तान में स्थित एक प्राचीन बस्ती।
- हड़प्पा — पंजाब क्षेत्र में स्थित सिंधु सभ्यता का प्रमुख स्थल।
- मोहनजोदड़ो — सिंध में स्थित सिंधु सभ्यता का प्रसिद्ध नगरीय केंद्र।
UNESCO के अनुसार मोहनजोदड़ो सिंधु घाटी सभ्यता के महत्वपूर्ण शहरी केंद्रों में से एक था और इसका विकास तीसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व में हुआ। यहां सुनियोजित सड़कें, जल निकासी और शहरी व्यवस्था के प्रमाण मिले हैं।
क्या पाकिस्तान की जड़ें सच में 9,000 साल पुरानी हैं?
इस सवाल का जवाब शब्दों के इस्तेमाल पर निर्भर करता है। अगर बात वर्तमान पाकिस्तान की जमीन पर मानव सभ्यताओं और पुरातात्विक संस्कृतियों की हो रही है, तो यह क्षेत्र वास्तव में हजारों साल पुराना इतिहास रखता है। लेकिन अगर इससे यह अर्थ निकाला जाए कि आधुनिक पाकिस्तान नाम का देश 9,000 साल पुराना है, तो यह ऐतिहासिक रूप से सही नहीं होगा। पाकिस्तान एक आधुनिक राष्ट्र-राज्य के रूप में 14 अगस्त 1947 को अस्तित्व में आया। Metropolitan Museum of Art के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार आज के पाकिस्तान के साथ-साथ उत्तर-पश्चिमी भारत तक था। इसलिए इसे केवल आधुनिक पाकिस्तान की सीमाओं तक सीमित करना इतिहास की पूरी तस्वीर नहीं देता।
मोहनजोदड़ो और हड़प्पा क्यों हैं खास?
सिंधु सभ्यता दक्षिण एशिया की सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन नगरीय सभ्यताओं में गिनी जाती है। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा इसके प्रमुख केंद्र थे। UNESCO के मुताबिक मोहनजोदड़ो लगभग 2500–1500 ईसा पूर्व के बीच फली-फूली सिंधु सभ्यता का प्रमुख महानगर था। इसके अवशेष उस दौर की उन्नत शहरी योजना और नागरिक व्यवस्था का प्रमाण देते हैं। Metropolitan Museum भी बताता है कि सिंधु सभ्यता का क्षेत्र आधुनिक पाकिस्तान से आगे बढ़कर पश्चिमी भारत तक फैला हुआ था।
सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी बहस ?
काकड़ के पोस्ट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने दो अलग-अलग दृष्टिकोण रखे। कुछ लोगों ने कहा कि वर्तमान पाकिस्तान के क्षेत्र में मौजूद प्राचीन सभ्यताओं को पाकिस्तान की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बताया जा सकता है। वहीं, कुछ यूजर्स ने तर्क दिया कि इन सभ्यताओं को आधुनिक पाकिस्तान के राष्ट्र-इतिहास के साथ सीधे जोड़ना उचित नहीं है, क्योंकि सिंधु सभ्यता आधुनिक भारत और पाकिस्तान दोनों के भूभाग में फैली हुई थी। इसलिए विवाद मूलतः प्राचीन सभ्यताओं की विरासत और आधुनिक राष्ट्र-राज्य की पहचान के बीच अंतर को लेकर है।
इतिहास क्या बताता है ?
इतिहास और पुरातत्व के स्तर पर यह तथ्य स्थापित है कि वर्तमान पाकिस्तान का भूभाग अत्यंत प्राचीन सभ्यताओं का केंद्र रहा है। UNESCO मोहनजोदड़ो को सिंधु सभ्यता का महत्वपूर्ण महानगरीय केंद्र बताता है और यह स्थल आज पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित है। साथ ही, सिंधु सभ्यता आधुनिक भारत और पाकिस्तान दोनों क्षेत्रों में फैली हुई थी। इसलिए प्राचीन विरासत को किसी एक आधुनिक देश की शुरुआत के समान मानना इतिहास को सरल बनाना होगा। यानी सभ्यता पुरानी है, लेकिन आधुनिक पाकिस्तान राष्ट्र 1947 में बना। यही अंतर इस पूरे विवाद को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।




