गाजा/न्यूयॉर्क, 25 सितंबर 2026 : युद्ध, विस्थापन, भूख और आर्थिक संकट के बीच गाजा में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर एक स्थिति सामने आई है। रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि गाजा में एक पिता ने अपनी बेटी की शादी दो बोरी आटे के बदले कर दी, जिससे वह अपने परिवार की भूख मिटा सके। मालूम हो कि संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष यानी UNFPA की सितंबर 2026 की रिपोर्ट में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ लैंगिक हिंसा, जबरन शादी और बाल विवाह से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। UNFPA के मुताबिक जनवरी से जून 2026 के बीच रिपोर्ट किए गए जबरन और बाल विवाह के मामलों में 123% की बढ़ोतरी हुई है। एजेंसी ने बताया कि इसके पीछे भूख, गरीबी, आय के साधनों का खत्म होना, विस्थापन और स्कूलों के बंद होने जैसी परिस्थितियां मुख्य कारक हैं। हालांकि यह आंकड़ा रिपोर्ट किए गए मामलों का है।
2 बोरी आटे के बदले 14 साल की बेटी की शादी का दावा
UNFPA की 17 सितंबर को जारी रिपोर्ट “I Want to Feel Safe Again: Women’s Voices From Displacement Camps in Khan Younis and Gaza City” में 230 विस्थापित महिलाओं के अनुभव दर्ज किए गए हैं। ये महिलाएं गाजा सिटी और खान यूनिस के विस्थापन शिविरों में रह रही थीं।रिपोर्ट में खान यूनिस की एक महिला ने एक 14 वर्षीय लड़की का मामला बताया। उसके मुताबिक, पिछले साल अकाल जैसी परिस्थितियों के दौरान एक पिता ने अपनी बेटी की शादी दो बोरी आटे के बदले कर दी, ताकि वह खुद और उसके दूसरे बच्चों के लिए भोजन जुटा सके। रिपोर्ट में अलग-अलग विस्थापन शिविरों की छह महिलाओं ने भोजन या बुनियादी जरूरतों के बदले लड़कियों की शादी किए जाने जैसी घटनाओं के बारे में बताया। UNFPA के अनुसार, महिलाओं ने कहा कि युद्ध से पहले इस तरह की घटनाओं की कल्पना करना भी मुश्किल था।
रेप के बाद आरोपी या दूसरे व्यक्ति से शादी का दबाव
UNFPA की रिपोर्ट में यौन हिंसा के भी कई प्रत्यक्ष अनुभव दर्ज हैं। महिलाओं ने बताया कि विस्थापन शिविरों, स्कूलों में बनाए गए अस्थायी आश्रयों, सड़कों और समुद्र के किनारे तक यौन हिंसा की घटनाओं के बारे में उन्होंने सुना या देखा। कुछ महिलाओं के मुताबिक जब आरोपी पीड़िता को जानता था तो परिवार या समुदाय के दबाव में घटना को छिपाने की कोशिश की जाती थी। रिपोर्ट में ऐसे मामलों का भी जिक्र है, जहां रेप की पीड़िता की शादी आरोपी या किसी दूसरे व्यक्ति से कराने का दबाव बनाया गया। एक महिला ने रिपोर्ट में बताया कि स्कूल में रेप की घटना सामने आने के बाद अगले ही दिन उसी जगह शादी और जश्न होते देखे गए।
युद्ध में माता-पिता खोने वाली लड़कियां भी खतरे में
रिपोर्ट के अनुसार, जिन लड़कियों ने युद्ध में अपने माता-पिता खो दिए हैं, वे भी जबरन या कम उम्र में शादी के जोखिम का सामना कर रही हैं। गाजा सिटी के एक विस्थापन शिविर में रहने वाली महिला ने बताया कि उसके परिवार की 14 और 15 साल की दो लड़कियों के माता-पिता युद्ध में मारे गए थे। इसके बाद उनके चाचाओं ने उनकी शादी करा दी। रिपोर्ट में महिलाओं ने बताया कि विस्थापन और आर्थिक संकट ने बच्चों की देखभाल और सुरक्षा की पारंपरिक व्यवस्थाओं को भी कमजोर किया है।
दिव्यांग लड़कियों के लिए जोखिम और बढ़ा
UNFPA की रिपोर्ट में दिव्यांग महिलाओं और लड़कियों को भी विशेष रूप से vulnerable बताया गया है। रिपोर्ट में महिलाओं ने ऐसे मामलों का जिक्र किया, जिनमें दिव्यांग लड़कियों की स्थिति का फायदा उठाकर उनके साथ यौन उत्पीड़न किया गया। एक मामले में एक लड़की कई घंटों तक लापता रही। परिवार को शुरुआत में लगा कि वह डर के कारण परेशान है। बाद में उसके गर्भवती होने का पता चला और उसके साथ यौन हिंसा की आशंका सामने आई।
परिवार के भीतर भी बढ़ी हिंसा
UNFPA की रिपोर्ट सिर्फ बाहरी खतरों की बात नहीं करती। इसमें घरेलू हिंसा के बढ़ने की भी तस्वीर सामने आती है। महिलाओं ने बताया कि घर उजड़ने, बेरोजगारी, गरीबी, लगातार विस्थापन, भीड़भाड़ और तनाव ने परिवारों के भीतर हिंसा का खतरा बढ़ाया है। रिपोर्ट में मारपीट, गाली-गलौज, यौन हिंसा और आर्थिक नियंत्रण से जुड़े अनुभव दर्ज किए गए हैं। कुछ महिलाओं ने बताया कि पुरुष अपने तनाव और गुस्से का असर पत्नी और बच्चों पर निकाल रहे हैं।
टेंट में 12 लोग, निजता खत्म होने से बढ़ा खतरा
विस्थापन शिविरों में रहने की परिस्थितियां भी महिलाओं की सुरक्षा को प्रभावित कर रही हैं। रिपोर्ट में एक महिला के अनुभव का जिक्र है, जिसके मुताबिक उसके पति ने बच्चों के सामने यौन संबंध बनाने की मांग की। महिला के इनकार के बाद उसके साथ मारपीट की गई। रिपोर्ट यह भी बताती है कि कई परिवार बेहद छोटे और भीड़भाड़ वाले टेंटों में रह रहे हैं। ऐसे माहौल में महिलाओं और लड़कियों के लिए privacy और safe spaces की कमी सुरक्षा जोखिम को बढ़ाती है।
मानवीय मदद पर भी नियंत्रण
भोजन और दूसरी जरूरी वस्तुओं की कमी ने महिलाओं की स्थिति को और मुश्किल बनाया है। रिपोर्ट में कुछ महिलाओं ने बताया कि उनके पति मानवीय सहायता से मिलने वाली चीजों और आर्थिक संसाधनों पर नियंत्रण रखते हैं। कुछ महिलाओं को डर रहता है कि अगर पति को सहायता मिलने की जानकारी हुई तो वह बच्चों तक पहुंचने वाली मदद को भी रोक सकता है। UNFPA ने बताया कि संसाधनों और अवसरों से वंचित करना गाजा में दर्ज लैंगिक हिंसा का सबसे अधिक रिपोर्ट किया गया रूप है।
यौन हिंसा के दर्ज मामलों में 61% बढ़ोतरी
UNFPA के April-June 2026 GBV Trends Analysis के मुताबिक, दूसरी तिमाही में दर्ज यौन हिंसा के मामलों की संख्या पिछली तिमाही की तुलना में 61% बढ़ी। अप्रैल-जून में यौन हिंसा दर्ज किए गए GBV मामलों का 2.7% थी, जबकि जनवरी-मार्च में यह हिस्सेदारी 2.1% थी। इसी अवधि में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ दर्ज कुल GBV मामलों में भी पिछली तिमाही के मुकाबले 27% वृद्धि हुई। UNFPA ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े सेवा प्रदाताओं के पास रिपोर्ट किए गए मामलों पर आधारित हैं। इसलिए इनमें वास्तविक घटनाओं की पूरी तस्वीर शामिल होना जरूरी नहीं है। बेहतर reporting और support services तक पहुंच बढ़ने से भी दर्ज मामलों की संख्या बढ़ सकती है।
500 विस्थापन स्थलों पर सुरक्षा चुनौती
UNFPA के मुताबिक गाजा में करीब 500 displacement sites में महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंच आसान नहीं है। ऐसे Safe Spaces में महिलाएं और लड़कियां हिंसा की जानकारी साझा करने के साथ मेडिकल, psychosocial, legal और आर्थिक सहायता हासिल कर सकती हैं। एजेंसी ने कहा है कि इन सेवाओं को मजबूत करने के लिए मानवीय सहायता में gender-based violence prevention और response को केंद्रीय प्राथमिकता बनाना जरूरी है।
युद्ध के बीच लड़कियों का भविष्य भी संकट में
UNFPA ने अप्रैल 2026 में भी चेतावनी दी थी कि गाजा में बाल विवाह और किशोर गर्भावस्था का जोखिम बढ़ रहा है। संगठन के अनुसार, युद्ध से पहले फिलिस्तीन में बाल विवाह की दर में लंबे समय तक गिरावट आई थी, लेकिन युद्ध, विस्थापन, गरीबी और सुरक्षा संकट ने लड़कियों पर शादी का दबाव बढ़ाया है। सितंबर की नई रिपोर्ट इस तस्वीर को और गंभीर बनाती है। 123% की वृद्धि वास्तविक कुल घटनाओं का अनुमान नहीं, बल्कि रिपोर्ट किए गए जबरन और बाल विवाह के मामलों में बदलाव है। फिर भी UNFPA के अनुसार यह गाजा में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा व्यवस्था पर बढ़ते दबाव का महत्वपूर्ण संकेत है।




