इस्‍लामाबाद, 15 सितंबर 2026 : पाकिस्तान अब चीन के लिए गधों का बड़ा सप्लायर बनता जा रहा है। चीन में गधे के मांस और चमड़े की मांग के चलते पाकिस्तान से बड़े पैमाने पर गधों के निर्यात की खबर सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन गधे के मांस का इस्तेमाल खाने के अलावा पारंपरिक दवाओं और चमड़े से बनने वाले उत्पादों में करता है। इसलिए चीन में गधों की मांग तेजी से बढ़ती ही जा रही है।

चीन को क्यों चाहिए इतने गधे ?

चीन में गधों की आबादी लगातार कम होने के कारण वहां घरेलू स्तर पर मांग पूरी करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में चीन ब्राजील, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया समेत दूसरे देशों से गधों का आयात कर रहा है। अमेरिकी कांग्रेस रिसर्च सर्विस की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल करीब 23 से 48 लाख गधों को मांस और चमड़े के लिए काटे जाने का अनुमान है। रिपोर्ट में चीन की घटती गधा आबादी को अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात बढ़ने की एक वजह बताया गया है।

पाकिस्तान के लिए गधे बने कमाई का नया जरिया

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब 60 लाख गधे हैं और चीन वहां के लिए गधों का एक बड़ा बाजार बन गया है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में चीन को निर्यात के लिए गधों के प्रसंस्करण से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। बताया गया है कि ग्वादर के पास Hangeng Group एक प्रोसेसिंग प्लांट चला रहा है। यहां प्रतिदिन करीब 800 गधों को प्रोसेस करने की क्षमता विकसित करने की तैयारी का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इससे पाकिस्तान को हर महीने करीब 5 मिलियन डॉलर की कमाई हो सकती है।

CPEC से जुड़ा बताया जा रहा कारोबार

रिपोर्ट में बलूचिस्तान के इस प्रोजेक्ट को China-Pakistan Economic Corridor (CPEC) से भी जोड़ा गया है। पाकिस्तान के लिए यह कारोबार विदेशी मुद्रा कमाने के एक नए स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, बलूचिस्तान लंबे समय से हिंसा और अस्थिरता से जूझता रहा है। ऐसे में इस क्षेत्र में बड़े कारोबारी और औद्योगिक प्रोजेक्ट भी राजनीतिक और सुरक्षा कारणों से चर्चा में रहते हैं।

गधे की चमड़ी से बनती है पारंपरिक दवा

चीन में गधे की चमड़ी से जिलेटिन बनाने की परंपरा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका इस्तेमाल पारंपरिक चीनी चिकित्सा में किया जाता है। इससे बनने वाले उत्पादों को रक्त संबंधी समस्याओं, इम्युनिटी और नींद जैसी समस्याओं में उपयोगी बताया जाता है, हालांकि ऐसे स्वास्थ्य संबंधी दावों को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अलग-अलग तरीके से देखा जाता है। गधे की चमड़ी का इस्तेमाल कॉस्मेटिक्स में भी किया जाता है। चीन में जिलेटिन की बढ़ती मांग के कारण गधे की खाल की जरूरत बढ़ी है।

अफ्रीका तक पहुंची चीन की मांग

चीन में गधों की संख्या घटने के बाद अब उसकी नजर दूसरे देशों पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अफ्रीकी देशों से भी गधों की आपूर्ति को लेकर बातचीत कर रहा है। इस बढ़ती मांग को लेकर चिंता भी जताई जा रही है कि अगर गधों का बड़े पैमाने पर निर्यात और वध जारी रहा तो कुछ अफ्रीकी देशों में इनकी आबादी पर दबाव बढ़ सकता है।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, चीन में donkey meat और donkey hide की मांग ने अंतरराष्ट्रीय कारोबार को बढ़ावा दिया है। पाकिस्तान भौगोलिक नजदीकी और चीन के साथ मजबूत कारोबारी संबंधों के कारण इस बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, गधों की वास्तविक निर्यात मात्रा और इससे होने वाली आय के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर हो सकता है।