बीजिंग, 1 अक्टूबर 2026 : चीन सिर्फ दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल नहीं है, बल्कि Gold Mining के मामले में भी लंबे समय से शीर्ष पर है। World Gold Council के मुताबिक 2025 में चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश रहा और वैश्विक खदान उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 10% रही। US Geological Survey के आंकड़ों में 2025 के लिए चीन का mined-gold production करीब 380 मीट्रिक टन बताया गया है। लेकिन चीन की यह स्थिति अचानक नहीं बनी। इसके पीछे दशकों की exploration, mining technology, processing capacity और industry coordination की भूमिका रही है।

2007 में दक्षिण अफ्रीका को पीछे छोड़ा

चीन ने 2007 में दक्षिण अफ्रीका को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा सोना उत्पादक बनने की स्थिति हासिल की। World Gold Council के अनुसार चीन तब से लगातार वैश्विक स्तर पर शीर्ष उत्पादकों में बना हुआ है। 2017 में ही चीन का उत्पादन 426.14 टन तक पहुंच गया था। इस बदलाव के पीछे चीन में बड़े पैमाने पर gold exploration और mining infrastructure का विस्तार महत्वपूर्ण रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में mining areas और कंपनियों ने उत्पादन बढ़ाने में भूमिका निभाई।

सिर्फ बड़ी खदानों पर निर्भर नहीं रहा चीन

चीन की gold industry की एक खासियत उसका व्यापक mining network है। World Gold Council के पुराने industry analysis के मुताबिक, चीन में सोने का उत्पादन कई हजार mining areas में फैला हुआ था और सैकड़ों कंपनियां इस क्षेत्र में सक्रिय थीं। यानी चीन की रणनीति सिर्फ एक-दो विशाल gold mines पर निर्भर रहने की नहीं रही। अलग-अलग क्षेत्रों में mining और processing क्षमता विकसित करने से कुल उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिली।

Low-grade ore से भी सोना निकालने की तकनीक

Gold mining में एक बड़ी चुनौती कम मात्रा में सोना रखने वाले ore को आर्थिक रूप से process करना है। इसके लिए दुनिया में Pressure Oxidation यानी POX जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता है। यह तकनीक विशेष रूप से ऐसे refractory ores के processing में उपयोगी हो सकती है, जिन्हें सामान्य तरीकों से process करना कठिन होता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि POX तकनीक चीन ने खोजी या केवल चीन की वजह से विकसित हुई। ऐसी technologies का commercial development अमेरिका और कनाडा समेत कई देशों में हुआ है। चीन ने इन्हें अपने व्यापक mining-processing ecosystem के साथ इस्तेमाल किया।

अमेरिका का ‘कनेक्शन’ क्या है ?

चीन के gold superpower बनने की कहानी में अमेरिका का connection सीधे तौर पर किसी एक अमेरिकी तकनीक या कंपनी तक सीमित नहीं है। Gold processing technologies का विकास अंतरराष्ट्रीय mining industry में हुआ है और अमेरिका, कनाडा, रूस तथा चीन जैसे देशों ने अलग-अलग समय पर इन्हें बड़े पैमाने पर अपनाया। इसलिए “अमेरिका की तकनीक लेकर चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया” कहना एक सरलीकृत व्याख्या होगी। ज्यादा सटीक बात यह है कि चीन ने वैश्विक mining technologies को अपनाकर अपनी विशाल mining और processing क्षमता के साथ जोड़ा।

चीन सिर्फ सोना निकालता ही नहीं, खपत भी करता है

चीन की भूमिका mining तक सीमित नहीं है। वह दुनिया के सबसे बड़े gold markets में भी शामिल है। World Gold Council के अनुसार, चीन लंबे समय से gold production और gold consumption दोनों में प्रमुख भूमिका निभाता रहा है। Shanghai Gold Exchange भी वैश्विक gold trading market का महत्वपूर्ण केंद्र है। 2025 में वैश्विक gold demand रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची। World Gold Council के अनुसार, पूरे साल global gold demand करीब 5,002 टन रही, जबकि mine production लगभग 3,672 टन रही।

Gold reserves और imports की कहानी

चीन के gold market की एक और खासियत यह है कि घरेलू mining production उसकी पूरी gold requirement का अकेला स्रोत नहीं है। देश का gold market mining के साथ-साथ imports, recycling, jewellery demand, investment demand और central-bank purchases से भी जुड़ा हुआ है। इसी वजह से चीन को केवल “सबसे बड़ा gold producer” कहने के बजाय global gold ecosystem का बड़ा केंद्र कहना ज्यादा सटीक है।

चीन कैसे बना Gold Superpower ?

चीन की gold story को मोटे तौर पर चार हिस्सों में समझा जा सकता है:

1. Exploration: देश में बड़े पैमाने पर gold resources की खोज और mapping।

2. Mining expansion: अलग-अलग क्षेत्रों में mining operations का विस्तार।

3. Processing technology: कठिन और low-grade ores को process करने की तकनीक में निवेश।

4. विशाल domestic market: jewellery, investment और financial markets के कारण gold की मजबूत घरेलू मांग।

इन्हीं कारणों के संयोजन ने चीन को दुनिया के सबसे बड़े gold-producing देशों में शीर्ष स्थान पर बनाए रखा है। World Gold Council के नवीनतम country data में भी 2025 के लिए चीन नंबर-1 gold producer है।

Bottom Line

चीन का Gold Superpower बनना किसी एक खदान, एक तकनीक या अमेरिका से मिली किसी एक technology का परिणाम नहीं है। यह दशकों तक चले exploration, mining expansion, processing technology और विशाल domestic gold market के विकास का परिणाम है। आज उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चीन दुनिया का सबसे बड़ा gold-mining producer है और 2025 में उसका mined-gold production करीब 380 टन रहा।