नई दिल्ली/ ढाका, 21 सितंबर 2026 : नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को हुए BRICS शिखर सम्मेलन में बांग्लादेश की गैर-मौजूदगी को लेकर उसकी विदेश नीति पर चर्चा काफी तेज है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान को BRICS आउटरीच कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया था। हालांकि, बांग्लादेश ने सम्मेलन में शामिल नहीं होने का फैसला किया। बांग्लादेश की ओर से कहा गया कि निमंत्रण Tarique Rahman को प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि BIMSTEC के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में दिया गया था। इसके बाद ढाका ने BRICS सम्मेलन से दूरी बनाए रखी। हालांकि, भारत की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि तारिक रहमान को BRICS कार्यक्रम के लिए निमंत्रण और भारत की द्विपक्षीय यात्रा के लिए निमंत्रण अलग-अलग थे। इसी अंतर को लेकर दोनों देशों के रुख में फर्क सामने आया।

BRICS सम्मेलन में क्यों नहीं पहुंचे तारिक रहमान ?

10 सितंबर को बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा था कि तारिक रहमान BRICS सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे। बांग्लादेश का तर्क था कि निमंत्रण उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में नहीं बल्कि BIMSTEC अध्यक्ष के तौर पर दिया गया था। ढाका का कहना था कि तारिक रहमान की पहली भारत यात्रा अलग से द्विपक्षीय यात्रा के रूप में होनी चाहिए। दूसरी ओर, भारत ने कहा कि BRICS आउटरीच के लिए दिया गया निमंत्रण और द्विपक्षीय यात्रा का निमंत्रण अलग-अलग थे। ऐसे में BRICS कार्यक्रम में शामिल होना भारत की द्विपक्षीय यात्रा से अलग विषय था।

BIMSTEC अध्यक्ष के तौर पर क्या था मौका ?

बांग्लादेश इस समय BIMSTEC की अध्यक्षता कर रहा है। संगठन में बांग्लादेश, भारत, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं। BRICS आउटरीच मंच पर Tarique Rahman को BIMSTEC अध्यक्ष के तौर पर क्षेत्रीय मुद्दे उठाने का अवसर मिल सकता था। कनेक्टिविटी, व्यापार, ऊर्जा, समुद्री सहयोग, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दे BIMSTEC के एजेंडे में महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, यह कहना कि सम्मेलन में शामिल नहीं होने से बांग्लादेश को निश्चित रूप से आर्थिक नुकसान हुआ, अभी उपलब्ध तथ्यों से साबित नहीं होता। किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भागीदारी अपने आप निवेश, व्यापार समझौते या आर्थिक लाभ की गारंटी नहीं देती।

BRICS और NDB से बांग्लादेश का पहले से जुड़ाव

बांग्लादेश BRICS का पूर्ण सदस्य नहीं है, लेकिन वह New Development Bank (NDB) का सदस्य है। बांग्लादेश सितंबर 2021 में NDB में शामिल हुआ था। NDB की आधिकारिक जानकारी के अनुसार बैंक बुनियादी ढांचे और सतत विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए वित्त उपलब्ध कराता है। बांग्लादेश में NDB से जुड़े प्रोजेक्ट भी मौजूद हैं। इस वजह से BRICS से जुड़े आर्थिक संस्थागत नेटवर्क के साथ बांग्लादेश का पहले से संपर्क है। हालांकि, NDB की सदस्यता का अर्थ BRICS की सदस्यता नहीं है और दोनों को एक ही चीज के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।

भारत के साथ मतभेदों का असर

भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में कई संवेदनशील मुद्दे हैं। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भारत में रहना और उनके प्रत्यर्पण की बांग्लादेश की मांग प्रमुख मुद्दों में शामिल है। तारिक रहमान सरकार भारत के साथ इन मुद्दों पर अलग से बातचीत करना चाहती है। इसी वजह से ढाका की ओर से द्विपक्षीय भारत यात्रा पर जोर दिया गया। हालांकि, किसी बहुपक्षीय सम्मेलन में शामिल होना और किसी देश के साथ द्विपक्षीय विवादों पर अपनी स्थिति बनाए रखना अलग-अलग विषय हो सकते हैं। किसी सम्मेलन में किसी नेता की मौजूदगी को अपने आप किसी विवाद पर समझौते के रूप में नहीं देखा जा सकता।

BRICS में शामिल होने से क्या हासिल हो सकता था ?

अगर तारिक रहमान BRICS आउटरीच कार्यक्रम में शामिल होते, तो उन्हें भारत के अलावा चीन, रूस, इंडोनेशिया, ईरान, खाड़ी देशों और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का अवसर मिल सकता था। ऐसे मंचों पर आमतौर पर व्यापार, निवेश, ऊर्जा, विकास, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर संपर्क बढ़ाने की संभावनाएं रहती हैं। लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी सम्मेलन में शामिल होना अपने आप में किसी आर्थिक या कूटनीतिक लाभ की गारंटी नहीं है। वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि बैठकों से आगे कौन-से समझौते, निवेश या वार्ताएं होती हैं।

क्या BRICS से दूरी को विदेश नीति की कमजोरी माना जा सकता है ?

यह एक राजनीतिक और कूटनीतिक आकलन का विषय है। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि बांग्लादेश ने निमंत्रण के प्रारूप को लेकर आपत्ति जताते हुए BRICS आउटरीच कार्यक्रम में शामिल नहीं होने का फैसला किया। इस फैसले को लेकर अलग-अलग विश्लेषक अलग-अलग निष्कर्ष निकाल सकते हैं। एक दृष्टिकोण यह है कि BIMSTEC अध्यक्ष के तौर पर मौजूद रहना बांग्लादेश को क्षेत्रीय और आर्थिक मुद्दे उठाने का अवसर देता। दूसरा दृष्टिकोण यह हो सकता है कि ढाका ने प्रधानमंत्री की आधिकारिक हैसियत और भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता देते हुए अपना प्रोटोकॉल रुख स्पष्ट किया। इसलिए फिलहाल इसे सीधे तौर पर “बांग्लादेश का नुकसान” कहना उचित नहीं होगा। इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन आगे भारत-बांग्लादेश संबंधों, व्यापार, निवेश, BIMSTEC और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर बांग्लादेश की गतिविधियों से किया जा सकता है।

आगे की दिशा क्या होगी ?

तारिक रहमान सरकार के सामने भारत के साथ संवेदनशील द्विपक्षीय मुद्दों को संभालने के साथ चीन, BRICS देशों, BIMSTEC और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ आर्थिक तथा कूटनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने की चुनौती है। BRICS सम्मेलन से दूरी का असर कितना व्यापक होगा यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। मगर फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि बांग्लादेश अपनी BIMSTEC अध्यक्षता और बहुपक्षीय मंचों का इस्तेमाल क्षेत्रीय व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और निवेश के लिए किस तरह करता है।