इस्लामाबाद, 17 सितंबर 2026 : पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा हालात के बीच पूर्व अफगान सैनिकों और पुलिसकर्मियों की कथित भर्ती को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। RFE/RL की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 2,000 पूर्व अफगान पुलिस अधिकारियों और सैनिकों को पाकिस्तान सरकार समर्थित सशस्त्र समूहों में शामिल किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने अब तक इस तरह के किसी भर्ती कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
पूर्व अफगान सैनिकों को भर्ती करने का दावा
RFE/RL से बातचीत में पाकिस्तान में रह रहे एक पूर्व अफगान सैनिक ने बताया कि उसे भी बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों के साथ काम करने का प्रस्ताव मिला था। उसके मुताबिक, यह प्रस्ताव पूर्व अफगान सरकार के पुलिस अधिकारी की ओर से आया था, जिसने अफगानिस्तान से पाकिस्तान पहुंचे कई पूर्व सुरक्षा कर्मियों से संपर्क किया। रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है कि 2,000 पूर्व अफगान पुलिसकर्मियों और सैनिकों को बलूचिस्तान में सरकार समर्थित सशस्त्र समूहों में भर्ती किया गया है। एक अन्य पूर्व अफगान सैनिक ने संख्या इससे ज्यादा होने का दावा किया है।
40 हजार पाकिस्तानी रुपये महीने की बात
रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती किए गए पूर्व अफगान सुरक्षा कर्मियों को करीब 40,000 पाकिस्तानी रुपये प्रति माह दिए जाने की बात सामने आई है। एक पूर्व अफगान सैनिक ने दावा किया कि भर्ती के बाद इन लोगों का स्थानीय पुलिस स्टेशनों से परिचय कराया जाता है, ताकि सुरक्षा चौकियों पर उनकी पहचान को लेकर परेशानी न हो। हालांकि, ये विवरण स्वतंत्र रूप से आधिकारिक तौर पर सत्यापित नहीं हुए हैं और पाकिस्तानी अधिकारियों ने भर्ती कार्यक्रम की पुष्टि नहीं की है।
बलूचिस्तान में पहले से जारी है हिंसा
बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। Balochistan Liberation Army (BLA) समेत बलूच अलगाववादी संगठन पाकिस्तानी राज्य के खिलाफ सशस्त्र अभियान चलाते रहे हैं। वहीं, Tehrik-e-Taliban Pakistan (TTP) ने भी प्रांत के उत्तरी हिस्सों में अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। इस वजह से क्षेत्र में सुरक्षा अभियान और सैन्य कार्रवाई लगातार जारी है। सितंबर में बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने भी विद्रोही समूहों के खिलाफ अभियान जारी रखने की बात कही थी।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने क्या कहा ?
पूर्व अफगान सैनिकों की कथित भर्ती को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए गए हैं। बलूचिस्तान विधानसभा के एक सदस्य ने हजारों पूर्व अफगान सैन्यकर्मियों को प्रांत में लाए जाने के दावे पर सरकार और सेना से स्पष्टीकरण मांगा था। RFE/RL के अनुसार, बलूचिस्तान सरकार ने ऐसे दावों के समर्थन में कोई सत्यापित जानकारी या सबूत होने से इनकार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR से भी इस संबंध में प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन जवाब नहीं मिला।
क्या इसे ‘कत्लेआम की तैयारी’ कहा जा सकता है ?
पूर्व अफगान सुरक्षा कर्मियों की कथित भर्ती को लेकर चिंता जरूर जताई जा रही है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में बलूच नागरिकों के खिलाफ किसी ‘कत्लेआम की योजना’ की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।RFE/RL ने भी इसे पूर्व अफगान सुरक्षा कर्मियों की संभावित भर्ती और सरकार समर्थित सशस्त्र समूहों से जुड़ी रिपोर्ट के रूप में पेश किया है। पाकिस्तान के अधिकारियों की ओर से भर्ती कार्यक्रम की पुष्टि नहीं होने के कारण इस दावे को फिलहाल आरोप या रिपोर्ट के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंधों पर भी असर
अगर पूर्व अफगान सुरक्षा कर्मियों की बड़ी संख्या में भर्ती की पुष्टि होती है तो इसका असर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के तालिबान शासन के बीच संबंधों पर भी पड़ सकता है। ये पूर्व सैनिक 2021 में तालिबान के काबुल पर नियंत्रण के बाद पाकिस्तान पहुंचे थे। बलूचिस्तान की जटिल सुरक्षा स्थिति में अलगाववादी समूहों, टीटीपी और अन्य सशस्त्र संगठनों की मौजूदगी के कारण किसी भी नए सशस्त्र समूह की भूमिका क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है। फिलहाल इस भर्ती से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है।




