इस्लामाबाद/लंदन, 11 सितंबर 2026 : भारत की बढ़ती परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को लेकर पाकिस्तान में बहस तेज हो गई है। हाल में सामने आई 'India's Nuclear Weapons 2026' रिपोर्ट को लेकर पाकिस्तान के रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ जफर खान ने भारत के परमाणु आधुनिकीकरण पर सवाल उठाए हैं। यॉर्कशायर स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ हल से जुड़े पाकिस्तानी प्रोफेसर जफर खान ने दावा किया है कि भारत केवल अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने पर ही काम नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें ले जाने वाली मिसाइलों, पनडुब्बियों और दूसरी रणनीतिक तकनीकों को लगातार आधुनिक बना रहा है। हालांकि भारत के परमाणु हथियारों की वास्तविक संख्या, तैनाती और भविष्य की मिसाइल क्षमताओं से जुड़े कई आंकड़े अनुमान और खुले स्रोतों पर आधारित आकलन हैं।

भारत के परमाणु हथियारों पर क्या है दावा ?

जफर खान के मुताबिक, भारत के पास करीब 190 परमाणु वॉरहेड होने का अनुमान है और भविष्य में यह संख्या 250 तक पहुंचने की क्षमता रखती है। उन्होंने भारत की परमाणु ताकत के समुद्री हिस्से को भी महत्वपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक, भारत की न्यूक्लियर-पावर्ड सबमरीन, समुद्र से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें यानी SLBM और MIRV जैसी तकनीकों पर बढ़ता जोर दक्षिण एशिया के रणनीतिक समीकरण को बदल सकता है। इन आंकड़ों को स्वतंत्र स्रोतों से अलग-अलग तरीके से आंका जाता है, इसलिए इन्हें निश्चित आधिकारिक संख्या के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

Agni-6 से क्यों जुड़ी है इतनी चर्चा ?

पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने भारत की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताओं का जिक्र करते हुए Agni-6 का भी उल्लेख किया है। कुछ दावों में इसकी संभावित रेंज 12,000 किलोमीटर तक बताई जाती है।अगर भविष्य में भारत के पास इतनी लंबी दूरी की विश्वसनीय ICBM क्षमता विकसित और तैनात होती है, तो इसका रणनीतिक असर केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। इसी वजह से भारतीय मिसाइल कार्यक्रम को लेकर पाकिस्तान के रणनीतिक हलकों में चिंता जताई जा रही है।हालांकि, Agni-6 की 12,000 किलोमीटर रेंज और इसकी वर्तमान operational deployment को स्थापित तथ्य की तरह पेश करना उचित नहीं है। इस तरह के दावों को संभावित क्षमता या विशेषज्ञों के आकलन के रूप में देखना चाहिए।

MIRV और SLBM से बदल सकता है न्यूक्लियर गेम

भारत के रणनीतिक कार्यक्रम में MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicles) तकनीक को अहम माना जा रहा है। इस तकनीक में एक मिसाइल से कई स्वतंत्र रूप से निर्देशित वारहेड ले जाने की क्षमता विकसित की जा सकती है। इसके अलावा समुद्र से परमाणु हथियार पहुंचाने वाली SLBM क्षमता भारत की न्यूक्लियर ट्रायड का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जमीन, हवा और समुद्र—तीनों माध्यमों से परमाणु हथियार पहुंचाने की क्षमता किसी देश की second-strike capability को मजबूत कर सकती है। यही वजह है कि भारत के समुद्री परमाणु कार्यक्रम पर पाकिस्तान समेत दूसरे देशों की भी नजर रहती है।

क्या यूरोप और अमेरिका तक पहुंच सकती हैं भारतीय मिसाइलें ?

जफर खान ने दावा किया है कि भारत की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताएं भविष्य में पाकिस्तान और चीन से आगे के लक्ष्यों तक पहुंचने की क्षमता पैदा कर सकती हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने यूरोप और अमेरिका तक संभावित पहुंच की बात कही है। लेकिन यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि किसी मिसाइल की अनुमानित/संभावित रेंज और किसी लक्ष्य को वास्तविक रूप से निशाना बनाने की operational capability एक ही चीज नहीं होती। भारत की मौजूदा परमाणु नीति और रणनीतिक क्षमताओं पर चर्चा करते समय deployment, accuracy, warhead configuration और command-and-control जैसे कई पहलुओं को भी ध्यान में रखना पड़ता है।

पाकिस्तान के लिए क्यों बढ़ी चिंता ?

पाकिस्तान और भारत के बीच लंबे समय से परमाणु और मिसाइल प्रतिद्वंद्विता चल रही है। भारत की लंबी दूरी की मिसाइलों, समुद्र आधारित परमाणु क्षमता और मिसाइल डिफेंस सिस्टम में विकास से पाकिस्तान के रणनीतिक योजनाकारों के लिए चुनौती बढ़ सकती है। जफर खान ने इसी बदलते रणनीतिक संतुलन पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भारत की परमाणु क्षमताओं के विस्तार के पीछे के कारणों और उसके रणनीतिक उद्देश्यों पर ज्यादा चर्चा होनी चाहिए।

भारत की परमाणु ताकत पर दुनिया की नजर

भारत का परमाणु कार्यक्रम केवल पाकिस्तान केंद्रित नहीं है। भारत की सुरक्षा रणनीति में चीन और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए भारत की मिसाइल और परमाणु क्षमताओं में होने वाले बदलाव का असर दक्षिण एशिया से आगे वैश्विक रणनीतिक समीकरण पर भी पड़ सकता है। हालांकि, भारत की वास्तविक सैन्य क्षमता को लेकर कई आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अनुमान हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।