इस्लामाबाद, 18 सितंबर 2026 : पाकिस्तान में सेना की राजनीतिक भूमिका और देश की आर्थिक स्थिति को लेकर JUI-F प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं। मौलाना डीजल के नाम से चर्चित फजलुर रहमान ने कहा है कि सेना का काम देश की सीमाओं की रक्षा करना है, जबकि पाकिस्तान में सरकार कौन चलाएगा, इसका फैसला जनता को अपने वोट से करना चाहिए।फजलुर रहमान ने साफ कहा कि वह सेना के विरोधी नहीं हैं, बल्कि राजनीति में सेना की दखलअंदाजी के खिलाफ हैं। उनके मुताबिक सेना को एक संस्था के तौर पर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों तक सीमित रहना चाहिए और राजनीतिक सत्ता का फैसला जनता के मत से होना चाहिए।
'सेना राजनीति में दखल न दे'
फजलुर रहमान ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सेना की वर्दी नहीं पहन सकता तो उसे राजनीतिक प्रक्रिया में भी हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान में शासन का अधिकार जनता के वोट से तय होना चाहिए। उनके ये बयान ऐसे समय आए हैं जब पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक दबाव और सुरक्षा हालात को लेकर लगातार बहस चल रही है। अगस्त में भी फजलुर रहमान ने कहा था कि पाकिस्तान को संविधान और जनता की इच्छा के मुताबिक चलाया जाना चाहिए, न कि दबाव या जबरदस्ती से।
भारत से तुलना कर पाकिस्तान को घेरा
फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति की तुलना भारत से करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच अक्सर युद्ध और प्रतिस्पर्धा की बातें होती हैं, लेकिन आर्थिक वास्तविकता पर भी ध्यान देना चाहिए।उन्होंने भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताते हुए पाकिस्तान की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने महंगाई और आर्थिक संकट का जिक्र करते हुए पूछा कि पाकिस्तान को आखिर किस उपलब्धि पर इतना गर्व है। फजलुर रहमान पहले भी भारत की आर्थिक स्थिति और पाकिस्तान की चुनौतियों की तुलना कर चुके हैं। अगस्त में उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार का हवाला देते हुए पाकिस्तान से अपनी वैश्विक स्थिति का आकलन करने को कहा था।
मदरसों के मुद्दे पर भी सरकार को चेतावनी
JUI-F प्रमुख ने पाकिस्तान में मदरसों को लेकर सरकार की नीतियों का भी विरोध किया। उन्होंने धार्मिक मदरसों को बंद करने और धर्मगुरुओं को निशाना बनाने की किसी भी कोशिश के खिलाफ कड़ा बयान दिया। फजलुर रहमान ने कहा कि मदरसों और धार्मिक संस्थानों को खत्म करना इतना आसान नहीं है। JUI-F का पाकिस्तान के धार्मिक मदरसा नेटवर्क से लंबे समय से राजनीतिक जुड़ाव रहा है और मदरसों के नियमन तथा पंजीकरण का मुद्दा वहां लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है।
सुरक्षा हालात पर भी उठाए सवाल
फजलुर रहमान ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हिंसा तथा कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि देश में सुरक्षा और शांति की स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान कैसे होगा। अगस्त में भी उन्होंने पाकिस्तान के बिगड़ते कानून-व्यवस्था के हालात को लेकर चिंता जताई थी और कहा था कि देश आर्थिक संकट और राजनीतिक दबाव के साथ गंभीर सुरक्षा चुनौतियों से गुजर रहा है।
भारत की अर्थव्यवस्था का आंकड़ा क्यों बना चर्चा का विषय?
फजलुर रहमान की टिप्पणी इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों को सीधे भारत की आर्थिक प्रगति से जोड़ दिया। हालिया रिपोर्टों में भी उनके हवाले से भारत की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने और दोनों देशों के विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना का उल्लेख किया गया है। हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों और पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर फजलुर रहमान के आकलन को उनके राजनीतिक बयान के रूप में देखना चाहिए। इन टिप्पणियों का मुख्य मुद्दा पाकिस्तान की आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा नीतियों पर उनका सवाल उठाना है।




