ढाका/नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026 : बांग्लादेश पहले से ही बिजली और ईंधन की कमी से जूझ रहा है और अब झारखंड स्थित अडानी पावर के गोड्डा प्लांट में आई तकनीकी खराबी ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। 1600 मेगावाट क्षमता वाले इस पावर प्लांट की 800 MW की एक यूनिट अचानक ट्रिप हो गई, जिसके बाद बांग्लादेश को होने वाली बिजली आपूर्ति में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस घटनाक्रम के बाद बांग्लादेश के पावर ग्रिड पर दबाव बढ़ने और ढाका समेत कई इलाकों में लोड-शेडिंग का खतरा गहराने की बात सामने आई है।
800 MW यूनिट में आई तकनीकी खराबी
रिपोर्ट के मुताबिक, गोड्डा पावर प्लांट की एक यूनिट में बॉयलर से जुड़ी तकनीकी समस्या सामने आई है। पावर ग्रिड और बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) से जुड़े सूत्रों के अनुसार, खराबी के बाद यूनिट को ग्रिड से अलग करना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक, बॉयलर को ठंडा होने में करीब 48 घंटे लग सकते हैं। इसके बाद मरम्मत का काम शुरू होगा और यूनिट को दोबारा सामान्य उत्पादन में आने में कुछ और दिन लग सकते हैं। उम्मीद है कि पूरी प्रक्रिया में करीब 3 से 4 दिन लग सकते हैं।
1400 MW से घटकर 750 MW से नीचे पहुंची सप्लाई
पावर ग्रिड बांग्लादेश के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार रात गोड्डा प्लांट से बिजली उत्पादन 1400 MW से अधिक पहुंच गया था। इसके बाद यूनिट ट्रिप होने से उत्पादन और आपूर्ति में अचानक गिरावट आई। शटडाउन के बाद बांग्लादेश को मिलने वाली बिजली की आपूर्ति 750 MW से नीचे चली गई। ऐसे में पहले से दबाव झेल रहे बांग्लादेशी पावर ग्रिड के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
पहले से ईंधन संकट से जूझ रहा बांग्लादेश
बांग्लादेश में बिजली संकट की स्थिति केवल गोड्डा प्लांट की तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में मौजूद कई पावर प्लांट कोयला, गैस और तेल की कमी के कारण पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। ईंधन की उपलब्धता में कमी के कारण कुछ बिजली संयंत्रों को बंद भी रखना पड़ता है, जबकि कई अन्य संयंत्र कम क्षमता पर संचालित हो रहे हैं। ऐसे में गोड्डा प्लांट की एक बड़ी यूनिट का बंद होना बांग्लादेश के लिए अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकता है।
बांग्लादेशी एक्सपर्ट ने उठाए सवाल
इस घटनाक्रम को लेकर बांग्लादेश में विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। वरिष्ठ पत्रकार मजमुल अहसान ने सोशल मीडिया पर इस घटनाक्रम को राजनीतिक घटनाओं से जोड़ते हुए टिप्पणी की। हालांकि, उनके बयान में लगाए गए राजनीतिक संकेतों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अडानी पावर की ओर से इस तकनीकी खराबी पर तत्काल कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई थी।
अब नजर मरम्मत और बिजली आपूर्ति बहाली पर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि गोड्डा प्लांट की 800 MW यूनिट कब तक दोबारा ग्रिड से जुड़ती है। यदि मरम्मत में अनुमान से ज्यादा समय लगता है, तो बांग्लादेश के बिजली संकट पर इसका असर और बढ़ सकता है। बांग्लादेश के लिए गोड्डा पावर प्लांट से होने वाली बिजली आपूर्ति ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब देश पहले ही ऊर्जा और ईंधन की चुनौतियों का सामना कर रहा है।




