ढाका/बीजिंग, 28 सितंबर 2026 : बांग्लादेश के बाॅडर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के अधिकारियों का चीन में ट्रेनिंग के लिए जाना खासे चर्चा में है। बांग्लादेश के गृह मंत्रालय के 22 सितंबर के सरकारी आदेश के मुताबिक, दो वरिष्ठ अधिकारियों को चीन में पांच दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेने की मंजूरी दी गई है, जबकि एक तीसरे अधिकारी को रिजर्व के तौर पर रखा गया है। यह ट्रेनिंग “Base Set complete with accessories-DMR VHF” से जुड़ी है और 27 सितंबर से एक अक्टूबर 2026 तक निर्धारित की गई है। इस घटनाक्रम के बाद भारत में यह सवाल उठ रहा है कि बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा व्यवस्था में चीन की तकनीकी और प्रशिक्षण भूमिका किस दिशा में बढ़ रही है। हालांकि, उपलब्ध सरकारी दस्तावेज में भारत-बांग्लादेश सीमा या किसी सैन्य समझौते से जुड़ी ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई है, जिससे यह कहा जा सके कि यह ट्रेनिंग भारत के खिलाफ किसी अभियान का हिस्सा है।
चीन जाने वाले BGB अधिकारियों में कौन-कौन शामिल हैं ?
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन जाने के लिए दो अधिकारियों को आधिकारिक तौर पर नामित किया गया है।पहले अधिकारी कर्नल मोहम्मद अनवर उल आलम हैं, जो BGB के डिप्टी डायरेक्टर जनरल और रामू सेक्टर हेडक्वार्टर के सेक्टर कमांडर हैं। दूसरे अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल गोलम मोहम्मद सैफुल आलम खान हैं, जो 49 BGB की जशोर बटालियन के डायरेक्टर और कमांडिंग ऑफिसर हैं। इसके अलावा लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद मोहिउस सुन्नाह, psc को रिजर्व अधिकारी के तौर पर नामित किया गया है। Northeast News ने भी सरकारी आदेश के आधार पर इन अधिकारियों के नाम और ट्रेनिंग की जानकारी प्रकाशित की है।
क्या है DMR-VHF ट्रेनिंग ?
सरकारी आदेश में ट्रेनिंग का नाम “Base Set complete with accessories-DMR VHF” दिया गया है। DMR यानी Digital Mobile Radio, जबकि VHF का मतलब Very High Frequency है।यह तकनीक डिजिटल रेडियो कम्युनिकेशन से जुड़ी है और बेस या फिक्स्ड स्टेशन पर इस्तेमाल होने वाले संचार उपकरणों के संचालन से संबंधित हो सकती है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इसका इस्तेमाल लंबी दूरी के संचार, बेहतर ऑडियो क्वालिटी और अन्य डिजिटल कम्युनिकेशन सुविधाओं के लिए किया जा सकता है। हालांकि सरकारी आदेश में ट्रेनिंग के पूरे तकनीकी मॉड्यूल का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए इससे आगे की किसी विशेष तकनीकी या सैन्य क्षमता के बारे में निष्कर्ष निकालना फिलहाल उचित नहीं होगा।
बांग्लादेश सरकार के दस्तावेज में क्या कहा गया है ?
बांग्लादेश के गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर 22 सितंबर 2026 को चीन में इसी ट्रेनिंग में भाग लेने के लिए सरकारी मंजूरी का रिकॉर्ड उपलब्ध है। रिकॉर्ड में ट्रेनिंग का नाम स्पष्ट रूप से “Base Set complete with accessories-DMR VHF” दिया गया है। सरकारी रिकॉर्ड से यह भी पुष्टि होती है कि यह कोई अनौपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि बांग्लादेश सरकार की स्वीकृति प्राप्त आधिकारिक विदेश यात्रा है। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेज में ट्रेनिंग कराने वाली चीनी संस्था का नाम, विस्तृत तकनीकी पाठ्यक्रम या किसी रक्षा समझौते का उल्लेख सामने नहीं आता। इसलिए इस कार्यक्रम को सीधे किसी बड़े China-Bangladesh Defence Deal से जोड़ना अभी तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
क्या इसका भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से सीधा कनेक्शन है ?
यही इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल है। BGB बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख संस्था है। इसलिए उसके वरिष्ठ अधिकारियों की कम्युनिकेशन सिस्टम से संबंधित विदेशी ट्रेनिंग को सीमा सुरक्षा के संदर्भ में देखा जा सकता है। लेकिन उपलब्ध सरकारी दस्तावेज में भारत-बांग्लादेश सीमा, भारत के खिलाफ किसी अभियान या चीन की ओर से बांग्लादेश को किसी विशेष सीमा रणनीति की ट्रेनिंग का उल्लेख नहीं है। इसलिए फिलहाल दो चीजों को अलग-अलग देखना जरूरी है—एक तरफ चीन में BGB अधिकारियों की आधिकारिक तकनीकी ट्रेनिंग है, दूसरी तरफ इससे जुड़े भारत की सुरक्षा संबंधी संभावित सवाल हैं। दोनों को एक ही तथ्य मान लेना उपलब्ध दस्तावेज से साबित नहीं होता।
चीन और बांग्लादेश के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ रहा है ?
इस घटनाक्रम का एक व्यापक संदर्भ भी है। 21 सितंबर 2026 को बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और चीन के तत्कालीन राजदूत याओ वेन के बीच बैठक हुई थी। बांग्लादेश की सरकारी सूचना के हवाले से Bangladesh Sangbad Sangstha (BSS) ने बताया कि दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, तकनीकी क्षमता बढ़ाने और ट्रेनिंग एक्सचेंज में सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई। चीनी राजदूत ने यह भी बताया था कि पिछले दो वर्षों में चीन ने बांग्लादेश के 100 से अधिक कानून-प्रवर्तन कर्मियों को इमिग्रेशन, ट्रैफिक मैनेजमेंट, साइबर सिक्योरिटी, पब्लिक सिक्योरिटी और UN peacekeeping जैसे विषयों में ट्रेनिंग दी है। इससे संकेत मिलता है कि चीन-बांग्लादेश के बीच सुरक्षा और प्रशिक्षण सहयोग केवल इस एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है।
BGB की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर बांग्लादेश का जोर
बांग्लादेश हाल के महीनों में अपनी सीमा निगरानी और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर भी जोर देता दिखाई दे रहा है। सितंबर 2026 की शुरुआत में बांग्लादेश ने सिलहट में अपना पहला Shimanto School of Surveillance and Drone Warfare शुरू किया। यहां BGB कर्मियों को थर्मल इमेजिंग और नाइट-विजन ड्रोन जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग देने की बात कही गई। इसका उद्देश्य दूरदराज के सीमा क्षेत्रों में निगरानी क्षमता बढ़ाना बताया गया। इसके अलावा BGB से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड में DMR-VHF वॉकी-टॉकी सिस्टम की खरीद का भी दस्तावेज मिलता है। मई 2025 में BGB ने “Walkie Talkie Set Complete - DMR VHF” के लिए टेंडर जारी किया था। इस पृष्ठभूमि में चीन में DMR-VHF से संबंधित ट्रेनिंग को बांग्लादेश की व्यापक कम्युनिकेशन और सीमा-निगरानी क्षमता विकसित करने की प्रक्रिया के हिस्से के रूप में भी देखा जा सकता है।
फिर भारत के लिए सवाल क्या है ?
भारत और बांग्लादेश की लंबी साझा सीमा है और दोनों देशों के लिए सीमा सुरक्षा, तस्करी, अवैध आवाजाही और अन्य सीमा-पार अपराध महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। ऐसे में बांग्लादेश की सुरक्षा एजेंसियों की तकनीकी क्षमता और उनके विदेशी प्रशिक्षण साझेदार भारत के लिए रणनीतिक रुचि का विषय हो सकते हैं। मगर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अभी यह कहना कि चीन बांग्लादेश के जरिए भारत की सीमा पर कोई नई रणनीति लागू कर रहा है, एक स्थापित तथ्य नहीं है। इसी तरह चीन की अरुणाचल प्रदेश संबंधी गतिविधियों और बांग्लादेश के BGB अधिकारियों की DMR-VHF ट्रेनिंग को सीधे जोड़ने के लिए भी अतिरिक्त प्रमाण की जरूरत होगी।
अभी सभी की नजर आगे की रणनीति पर टिकी है
बांग्लादेश के गृह मंत्रालय ने BGB से जुड़े अधिकारियों को चीन में पांच दिवसीय DMR-VHF बेस सेट ट्रेनिंग के लिए भेजने की आधिकारिक मंजूरी दी है। यह कार्यक्रम 27 सितंबर से एक अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है। यह भी तथ्य है कि ढाका और बीजिंग के बीच हाल में साइबर सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, तकनीकी क्षमता और ट्रेनिंग एक्सचेंज को लेकर सहयोग बढ़ाने की बात सामने आई है। हालांकि अभी इस ट्रेनिंग को भारत के खिलाफ किसी सैन्य या सीमा रणनीति से जोड़ना जल्दबाजी होगा।




