नई दिल्ली/कोलंबो, 10 सितंबर 2026 : इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच भारत ने अपनी सक्रियता और बढ़ा दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का श्रीलंका दौरा, भारत-जापान का वीर गार्डियन-2026 सैन्य अभ्यास और नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन की ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड यात्रा को भारत की क्षेत्रीय रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। इन गतिविधियों के बीच चीन के बढ़ते प्रभाव और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को लेकर भारत सहित कई देशों के बीच सहयोग मजबूत करने की कोशिशें तेज दिखाई दे रही हैं।
अमेरिका के रुख में बदलाव के बीच भारत की बढ़ी सक्रियता
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की इंडो-पैसिफिक नीति में बदलाव के संकेतों के बीच भारत ने इस क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक और रक्षा सक्रियता बढ़ाई है। भारत के लिए इंडो-पैसिफिक केवल समुद्री सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि व्यापार, ऊर्जा, समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में भारत जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इंडोनेशिया और श्रीलंका जैसे देशों के साथ अपने रिश्तों को लगातार मजबूत कर रहा है।
राजनाथ सिंह का श्रीलंका दौरा क्यों अहम ?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का श्रीलंका दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण है। यह करीब चार दशक बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री की श्रीलंका यात्रा है। कोलंबो में राजनाथ सिंह ने राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच सुरक्षा, शांति, विकास और समुद्री सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। राजनाथ सिंह ने इस दौरान भारत और श्रीलंका के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आपसी संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि संकट की स्थिति में भारत श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। श्रीलंका भारत की Neighbourhood First Policy और हिंद महासागर क्षेत्र से जुड़ी रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसकी भौगोलिक स्थिति भी इसे भारत की समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम बनाती है।
चीन के प्रभाव के बीच श्रीलंका क्यों महत्वपूर्ण ?
हिंद महासागर में श्रीलंका की रणनीतिक स्थिति उसे भारत और चीन दोनों के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। समुद्री व्यापार मार्गों के करीब स्थित होने के कारण श्रीलंका में होने वाली रणनीतिक गतिविधियों का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है। भारत लंबे समय से श्रीलंका को अपने निकटतम समुद्री पड़ोसियों में शामिल करता रहा है। ऐसे में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और आपदा के समय सहायता जैसे क्षेत्रों में रिश्ते मजबूत करना भारत की व्यापक Indo-Pacific रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड पर भी भारत का फोकस
इसी समय भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर हैं। इन देशों के साथ भारत का रक्षा और समुद्री सहयोग लगातार बढ़ रहा है। हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर इन देशों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण हो गया है। भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ बढ़ता संपर्क इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे हिंद महासागर और प्रशांत क्षेत्र के बीच रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
राजस्थान में भारत-जापान का बड़ा एयर एक्सरसाइज
दूसरी तरफ राजस्थान के जोधपुर में भारत और जापान की वायु सेनाओं के बीच वीर गार्डियन-2026 अभ्यास शुरू हुआ है। इस 14 दिवसीय अभ्यास में भारतीय वायु सेना की ओर से LCA तेजस, Su-30MKI और राफेल जैसे लड़ाकू विमान हिस्सा ले रहे हैं, जबकि जापान की ओर से F-2A फाइटर जेट शामिल हैं। अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच ऑपरेशनल तालमेल, मिशन प्लानिंग और तकनीकी सहयोग को बेहतर बनाना है। यह अभ्यास भारत-जापान के बढ़ते रणनीतिक और रक्षा संबंधों का भी संकेत देता है।
क्या बन रहा है नया Indo-Pacific समीकरण ?
भारत की हालिया गतिविधियों को एक साथ देखा जाए तो एक व्यापक तस्वीर सामने आती है। श्रीलंका के साथ समुद्री और रक्षा संबंध, जापान के साथ एयर एक्सरसाइज और ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड के साथ नौसैनिक सहयोग—ये सभी भारत की Indo-Pacific रणनीति को अधिक सक्रिय बनाते हैं। हालांकि इसे सीधे तौर पर किसी देश के खिलाफ सैन्य गठबंधन कहना उचित नहीं होगा। लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री स्वतंत्रता और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच समान हित रखने वाले देशों का आपसी सहयोग निश्चित रूप से बढ़ रहा है। भारत का प्रयास यह दिखाई देता है कि हिंद महासागर से लेकर पश्चिमी प्रशांत तक ऐसे देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत की जाए, जिनके हित क्षेत्रीय स्थिरता और स्वतंत्र समुद्री आवागमन से जुड़े हैं।
भारत के लिए Indo-Pacific में अपनी भूमिका बढ़ाना जरूरी
अमेरिका की बदलती क्षेत्रीय प्राथमिकताओं के बीच भारत के लिए Indo-Pacific में अपनी भूमिका बढ़ाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। राजनाथ सिंह का श्रीलंका दौरा, भारत-जापान वीर गार्डियन अभ्यास और नौसेना प्रमुख की ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड यात्रा इसी व्यापक रणनीतिक सक्रियता की ओर संकेत करते हैं। आने वाले समय में भारत किस तरह श्रीलंका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ रक्षा व समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाता है, यह Indo-Pacific के बदलते शक्ति संतुलन में अहम भूमिका निभा सकता है।




