न्यूयॉर्क, 22 सितंबर 2026 : संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के उच्च स्तरीय सप्ताह के दौरान Partners for Multilateralism, International Law, Peace and Prosperity (P4M) के पहले शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ। भारत ने इस पहल में सह-अध्यक्ष की भूमिका निभाई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वैश्विक व्यवस्था में बढ़ते तनाव के बीच बहुपक्षवाद को मजबूत करने की जरूरत पर विशेष रूप से जोर दिया। P4M को किसी एक देश या शक्ति के खिलाफ बनाया गया औपचारिक सैन्य या राजनीतिक गठबंधन नहीं बताया गया है। आधिकारिक घोषणा के अनुसार यह एक खुला मंच है, जिसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों के देशों को संवाद, सहयोग और वैश्विक संस्थाओं में सुधार के लिए साथ लाना है।

क्या है P4M Initiative ?

P4M का पूरा नाम Partners for Multilateralism, International Law, Peace and Prosperity है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव, संघर्ष, आर्थिक दबाव, व्यापारिक बाधाएं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। P4M का लक्ष्य मौजूदा बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करना और उसे ज्यादा भागीदारीपूर्ण, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में काम करना है। यूरोपीय परिषद के अनुसार, यह मंच संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं के काम को समर्थन देने, अलग-अलग क्षेत्रों के बीच संवाद बढ़ाने और वैश्विक संस्थाओं के सुधार एवं आधुनिकीकरण में योगदान देने के लिए बनाया गया है।

P4M में कौन-कौन देश शामिल हैं ?

P4M के शुरुआती सह-प्रायोजकों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा, यूरोपीय संघ और केन्या शामिल हैं। 21 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में इसके पहले शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा, केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज, बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया मोटली, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पहल के सह-प्रायोजकों के रूप में सूचीबद्ध हैं।

भारत की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है ?

भारत लंबे समय से वैश्विक संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की अधिक भागीदारी की बात करता रहा है। P4M के मंच पर भारत की भागीदारी इसी व्यापक बहुपक्षीय एजेंडे के संदर्भ में देखी जा रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सम्मेलन में कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था दबाव में है। उनके मुताबिक शक्ति संतुलन में बदलाव लंबे समय से चल रहा है, लेकिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों ने इस बदलाव को अधिक जटिल बना दिया है। जयशंकर ने अधिक भागीदारी वाले विचार-विमर्श और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद को मजबूत करने के लिए केवल उसके समर्थन की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके व्यवहार और संस्थागत ढांचे में भी सुधार जरूरी है।

क्या P4M अमेरिका, रूस और चीन के खिलाफ है?

P4M को सीधे तौर पर अमेरिका, रूस या चीन के खिलाफ गठबंधन कहना आधिकारिक दस्तावेजों के अनुरूप नहीं होगा। P4M की घोषणा में बढ़ती शक्ति-राजनीति, संरक्षणवाद, दबाव और बल प्रयोग की धमकी को लेकर चिंता जताई गई है, लेकिन पहल का घोषित उद्देश्य किसी एक देश को निशाना बनाना नहीं बल्कि बहुपक्षीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है। इसलिए इसे वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव के व्यापक संदर्भ में देखना अधिक सटीक होगा, न कि किसी एक देश के खिलाफ बने मोर्चे के रूप में।

4F संकट पर जयशंकर का जोर

P4M सम्मेलन में जयशंकर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद ईंधन, खाद्य, उर्वरक और वित्त से जुड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों पर किसी एक पक्ष के प्रभुत्व या आपूर्ति में बाधा के जोखिम को कम करने के लिए स्रोतों में विविधता और जोखिम कम करने की रणनीति जरूरी है। साझा हित रखने वाले देशों को ऐसे मामलों में मिलकर काम करने की जरूरत पर भी उन्होंने जोर दिया।

किन मुद्दों पर काम करना चाहता है P4M ?

P4M के एजेंडे में कई बड़े वैश्विक मुद्दे शामिल हैं। इनमें प्रमुख हैं—

  • अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा
  • अंतरराष्ट्रीय कानून और नियमों का पालन
  • संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार
  • जलवायु परिवर्तन और जलवायु न्याय
  • उभरती तकनीकों से जुड़ी चुनौतियां
  • विकास के लिए वित्तीय सहयोग
  • आतंकवाद से मुकाबला
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना
  • आपदाओं से निपटने की क्षमता
  • भविष्य की महामारियों के लिए तैयारी

जयशंकर ने इन मुद्दों को ऐसे क्षेत्र बताया, जिन पर देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।

P4M का संयुक्त राष्ट्र से क्या संबंध है ?

P4M को संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था का विकल्प बनाने के बजाय उसके साथ काम करने वाले मंच के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यूरोपीय परिषद के अनुसार, यह पहल संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय प्रारूपों के काम को समर्थन देने तथा वैश्विक संस्थाओं में सुधार और आधुनिकीकरण की दिशा में योगदान करने का प्रयास है। इसका मतलब है कि P4M का जोर समान विचार रखने वाले देशों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ मौजूदा वैश्विक संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर है।

आगे क्या है P4M का लक्ष्य ?

P4M की पहली बैठक के बाद इसके सह-प्रायोजकों ने शांति, स्थिरता, समावेशी और टिकाऊ विकास तथा सभी के अधिकारों के समर्थन में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके साथ ही बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर व्यापार, सुरक्षा, जलवायु, तकनीक और आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़े मुद्दे एक-दूसरे से तेजी से जुड़ रहे हैं, P4M का प्रयास विभिन्न क्षेत्रों के देशों को एक साझा मंच पर लाने का है। कुल मिलाकर P4M को किसी एक महाशक्ति के खिलाफ मोर्चे के बजाय बहुपक्षवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक संस्थागत सुधार को मजबूत करने की पहल के रूप में समझना अधिक सही होगा।