वॉशिंगटन, 21 सितंबर 2026 : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से मिली गलत जानकारी ने ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका और चीन के बीच गंभीर सैन्य टकराव का खतरा पैदा कर दिया था। CNN की एक खास रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना को खुफिया रिपोर्ट मिली थी, जिसमें दावा किया गया था कि मध्य-पूर्व से गुजर रहा एक चीनी जहाज परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े उपकरण ले जा रहा है। इस रिपोर्ट के आधार पर अमेरिकी सेना ने जहाज को रोकने और उस पर सवार होने की तैयारी शुरू कर दी। रिपोर्ट के अनुसार हथियारबंद अमेरिकी सैन्यकर्मी जहाज पर चढ़ने के लिए तैयार थे और सैन्य विमान भी हवा में भेजे जा चुके थे।

कार्रवाई से ठीक पहले खुली AI की गलती

अमेरिकी अधिकारियों ने ऑपरेशन शुरू होने से ठीक पहले खुफिया रिपोर्ट की दोबारा जांच की। इसी दौरान पता चला कि रिपोर्ट तैयार करने में AI की मदद ली गई थी और जिस चैटबॉट का इस्तेमाल किया गया था, उसने चीनी जहाज के कार्गो की गलत पहचान कर ली थी। CNN के मुताबिक अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड के एक विश्लेषक ने चैटबॉट का इस्तेमाल जहाज से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों को समझने के लिए किया था। AI ने उपलब्ध सूचनाओं को मिलाकर गलत निष्कर्ष निकाला और जहाज के सामान को परमाणु हथियार कार्यक्रम से जोड़ दिया। इसके बाद AI से मिली गलत जानकारी को एक खुफिया रिपोर्ट में शामिल किया गया। रिपोर्ट सैन्य अधिकारियों तक पहुंची और उसके आधार पर चीनी जहाज के खिलाफ संभावित कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई।

सैन्य विमान हवा में थे, तभी ऑपरेशन रोका गया

CNN की रिपोर्ट में कई सूत्रों के हवाले से बताया गया कि जब अधिकारियों को रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर दोबारा सवाल उठाने की जरूरत महसूस हुई, उस समय अमेरिकी सैन्य विमान हवा में थे और सैनिक जहाज पर चढ़ने की तैयारी कर रहे थे। जांच में रिपोर्ट को गलत पाए जाने के बाद प्रस्तावित कार्रवाई रोक दी गई। एक अमेरिकी अधिकारी ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह गलत बताया और कहा कि यह घटना संभावित रूप से बेहद गंभीर अंतरराष्ट्रीय टकराव का कारण बन सकती थी।

अभी यह साफ नहीं कि कौन-सा AI इस्तेमाल हुआ

इस घटना में इस्तेमाल किए गए AI चैटबॉट का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टिंग के मुताबिक यह किसी सामान्य व्यावसायिक चैटबॉट या अमेरिकी सरकार/सेना के किसी AI सिस्टम में से एक हो सकता है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि चीनी जहाज वास्तव में कौन-सा सामान ले जा रहा था। CNN की रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष यह है कि जहाज के कार्गो को परमाणु हथियार कार्यक्रम से जोड़ने वाली खुफिया जानकारी गलत थी।

अमेरिकी सेना में बढ़ रहा AI का इस्तेमाल

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिकी रक्षा तंत्र में AI के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाया जा रहा है। AI का इस्तेमाल खुफिया सूचनाओं का विश्लेषण, लक्ष्य की पहचान, सैन्य योजना और दूसरे प्रशासनिक कामों में बढ़ रहा है। CNN के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सेना में AI के व्यापक इस्तेमाल को बढ़ावा देने की नीति अपनाई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस नीति के तहत AI को सैन्य कामकाज के कई हिस्सों में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।

AI से मिली जानकारी की इंसानी जांच क्यों जरूरी ?

इस घटना ने सैन्य और खुफिया फैसलों में AI के इस्तेमाल को लेकर एक अहम सवाल खड़ा किया है। AI बड़ी मात्रा में जानकारी को तेजी से प्रोसेस कर सकता है, मगर वह गलत जानकारी को जोड़कर एक विश्वसनीय दिखने वाला गलत निष्कर्ष भी तैयार कर सकता है। इस मामले में AI से निकला गलत निष्कर्ष खुफिया रिपोर्ट का हिस्सा बना और फिर सैन्य अधिकारियों तक पहुंचा। इसलिए संवेदनशील सैन्य फैसलों में AI की जानकारी को स्वतंत्र मानव जांच से सत्यापित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह घटना यह भी दिखाती है कि AI की गलती सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं रह सकती-अगर गलत सूचना निर्णय लेने की श्रृंखला में आगे बढ़ जाए तो उसके अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।