बर्लिन, 9 सितंबर 2026 : जर्मनी में दक्षिणपंथी पार्टी Alternative for Germany (AfD) की चुनावी बढ़त ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। पार्टी की मजबूत चुनावी मौजूदगी के बाद उसके विरोध में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र, बहुलवाद और नस्लवाद-विरोध के समर्थन में रैलियां निकालीं और “Never Again” के नारे लगाए। AfD की बढ़ती ताकत को जर्मनी के नाजी अतीत के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि AfD को सीधे ऐतिहासिक नाजी पार्टी के बराबर रखना राजनीतिक रूप से विवादित तुलना है, लेकिन पार्टी की अप्रवासी-विरोधी और सुदूर-दक्षिणपंथी छवि को लेकर जर्मनी और यूरोप में चिंता लगातार बढ़ रही है।
सैक्सनी-एनहाल्ट में AfD की बड़ी बढ़त
रिपोर्ट के मुताबिक, सैक्सनी-एनहाल्ट के चुनाव में AfD को करीब 44 प्रतिशत वोट मिले और पार्टी ने राज्य विधानसभा की 83 में से 39 सीटों पर जीत दर्ज की। हालांकि उसे अकेले सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिला है। इसके बावजूद यह परिणाम जर्मन राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। AfD अब सरकार गठन के लिए अन्य दलों से समर्थन हासिल करने की कोशिश कर सकती है। अगर AfD सरकार बनाने में सफल होती है तो यह जर्मनी में नाजी शासन के बाद किसी सुदूर-दक्षिणपंथी पार्टी के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि होगी।
AfD के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग
चुनावी नतीजों के बाद राजधानी बर्लिन समेत कई शहरों में AfD के खिलाफ प्रदर्शन हुए। बर्लिन में प्रदर्शनकारी ब्रैंडेनबर्ग गेट के पास जमा हुए और लोकतंत्र के समर्थन में आवाज उठाई। पुलिस के अनुमान के अनुसार बर्लिन में करीब 5,000 लोग प्रदर्शन में शामिल हुए, जबकि आयोजकों ने यह संख्या 14,000 से अधिक बताई। पॉट्सडैम, ड्रेसडेन, म्यूनस्टर, गॉटिंगेन, आचेन, बैम्बर्ग और अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शन किए गए। प्रदर्शनकारियों ने नस्लवाद और फासीवाद के खिलाफ पोस्टर और बैनर लेकर मार्च किया।
‘Never Again’ से दिया संदेश
प्रदर्शनों में “Never Again” यानी “फिर कभी नहीं” का नारा प्रमुख रहा। इसका संबंध जर्मनी के नाजी अतीत से है और प्रदर्शनकारी यह संदेश देना चाहते हैं कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। पूर्व नाजी कंसंट्रेशन कैंप बुचेनवाल्ड मेमोरियल के निदेशक जेन्स-क्रिश्चियन वैगनर ने चुनावी परिणाम को लेकर चिंता जताई और AfD के नेतृत्व में सरकार बनने की संभावना को सामान्य रूप से स्वीकार नहीं करने की अपील की।
आखिर AfD को इतना समर्थन क्यों मिल रहा है ?
AfD के बढ़ते प्रभाव के पीछे कई राजनीतिक और सामाजिक कारण बताए जा रहे हैं।
इमिग्रेशन और शरणार्थी नीति
जर्मनी में Immigration और Refugee Policy लंबे समय से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा है। खास बात यह है कि प्रवासन, सीमा नियंत्रण और शरणार्थियों को लेकर जनता के एक हिस्से में काफी असंतोष है। AfD ने इसी मुद्दे पर सख्त रुख अपनाकर अपना समर्थन आधार मजबूत किया है।
आर्थिक चुनौतियां और महंगाई
जर्मनी की कमजोर आर्थिक वृद्धि, ऊर्जा लागत और महंगाई ने भी सरकार के प्रति असंतोष बढ़ाया है। आर्थिक दबाव के बीच कई मतदाता पारंपरिक पार्टियों से अलग विकल्प तलाश रहे हैं।
पूर्वी जर्मनी में क्षेत्रीय असंतोष
पूर्वी जर्मनी के कई राज्यों में लंबे समय से यह भावना रही है कि उन्हें देश के पश्चिमी हिस्से की तुलना में पर्याप्त राजनीतिक और आर्थिक महत्व नहीं मिलता है। AfD ने इस असंतोष को अपने पक्ष में इस्तेमाल किया है और इससे उनका जनाधार बढ़ गया है।
पारंपरिक पार्टियों से नाराजगी
CDU, SPD और Greens जैसी मुख्यधारा की पार्टियों की नीतियों को लेकर असंतोष भी AfD के लिए राजनीतिक अवसर बना है। पार्टी खुद को Anti-Establishment विकल्प के तौर पर पेश करती है।
चांसलर फ्रेडरिक मर्ज पर भी दबाव
AfD के प्रदर्शन ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और उनकी पार्टी CDU के सामने भी चुनौती बढ़ा दी है। मर्ज पहले ही AfD के साथ सहयोग करने से इनकार कर चुके हैं। हालांकि चुनावी नतीजों के बाद उन्होंने इस्तीफे की संभावना को खारिज किया और अपनी सरकार के सुधार कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की बात कही। अब जर्मनी में होने वाले आगामी राज्य चुनावों पर नजर रहेगी। खासकर मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया जैसे राज्यों में AfD की लोकप्रियता ने मुख्यधारा के दलों की चिंता बढ़ा दी है।
2029 के राष्ट्रीय चुनाव पर AfD की नजर
AfD की नेता एलिस वेडेल पहले ही पार्टी के लिए बड़ा लक्ष्य तय कर चुकी हैं। पार्टी 2029 के राष्ट्रीय चुनाव में कम से कम 40 प्रतिशत वोट हासिल करने की महत्वाकांक्षा जता रही है। ऐसे में जर्मनी की राजनीति में आने वाले वर्षों में मुकाबला और ज्यादा तीखा होने की संभावना है। AfD की बढ़ती लोकप्रियता जहां उसके समर्थकों के लिए राजनीतिक बदलाव का संकेत है, वहीं विरोधियों के लिए यह जर्मनी के लोकतांत्रिक मूल्यों और उसके नाजी अतीत की यादों से जुड़ी चिंता का विषय बनी हुई है।




