इस्लामाबाद, 25 सितंबर 2026 : अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ( IMF) ने कंगाल पाकिस्तान को कर्ज देने के लिए एक बड़ी शर्त रख दी है। IMF ने पाकिस्तान को बता दिया है कि अगर कर्ज चाहिए तो सुधार की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ानी होगी। इस तरह आर्थिक सुधारों के लिए IMF पर निर्भर पाकिस्तान के सामने अब करीब 174 कानूनी संशोधनों का एक बड़ा एजेंडा है। पाकिस्तान के वित्त सचिव इमदादुल्लाह बोसल ने नेशनल असेंबली की वित्त एवं राजस्व संबंधी स्थायी समिति को बताया कि IMF की ओर से करीब 174 संशोधनों की विशेष जरूरत बताई गई है। सरकार इन प्रस्तावित बदलावों को संसद के सामने मंजूरी के लिए रखने की तैयारी कर रही है। ये बदलाव सिर्फ टैक्स तक सीमित नहीं हैं। इनके दायरे में वित्तीय क्षेत्र, सरकारी कंपनियां (SOEs), विदेशी रेमिटेंस, सॉवरेन वेल्थ फंड, चीनी क्षेत्र, क्लाइमेट पॉलिसी और स्थानीय मुद्रा से जुड़े नियम जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।
$8.4 बिलियन के दो IMF कार्यक्रमों से जुड़ा मामला
पाकिस्तान इस समय IMF के दो कार्यक्रमों के तहत काम कर रहा है। इनमें करीब $7 बिलियन का Extended Fund Facility (EFF) और Resilience and Sustainability Facility (RSF) शामिल हैं। दोनों कार्यक्रमों का कुल आकार $8.4 बिलियन बताया गया है। IMF ने मई 2026 में पाकिस्तान के EFF की तीसरी समीक्षा और RSF की दूसरी समीक्षा पूरी की थी। उस समय IMF ने करीब $1.1 बिलियन EFF और करीब $220 मिलियन RSF जारी करने की मंजूरी दी थी। इसके साथ दोनों कार्यक्रमों के तहत कुल वितरण करीब $4.8 बिलियन हो गया था। अब पाकिस्तान के सामने अगले चरण की समीक्षा है। Dawn की रिपोर्ट के मुताबिक IMF का स्टाफ मिशन 28 सितंबर 2026 से चौथी EFF और तीसरी RSF समीक्षा के लिए बातचीत शुरू करने वाला है।
174 बदलावों में क्या-क्या शामिल है ?
टैक्स सिस्टम में बदलाव : IMF के कार्यक्रम में पाकिस्तान के लिए टैक्स बेस बढ़ाना, राजस्व संग्रह मजबूत करना और टैक्स व्यवस्था में सुधार प्रमुख लक्ष्य हैं। सरकार को टैक्स छूट और राजस्व से जुड़े कई प्रावधानों पर भी काम करना है। इसका उद्देश्य सरकारी आय बढ़ाना और बजट पर दबाव कम करना है। IMF ने पाकिस्तान के आर्थिक कार्यक्रम में व्यापक टैक्स बेस और मजबूत सार्वजनिक वित्त को प्राथमिकता दी है।
सरकारी कंपनियों पर बढ़ेगा फोकस : 174 प्रस्तावित बदलावों में State-Owned Enterprises यानी SOEs से जुड़े कानून भी शामिल हैं। IMF के अप्रैल 2026 के स्टाफ रिपोर्ट में सरकारी कंपनियों के governance, transparency और efficiency में सुधार तथा निजीकरण एजेंडे को कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया था। कुछ सरकारी कंपनियों के विशेष कानूनों को SOE Act के अनुरूप लाने की प्रक्रिया भी चल रही है।
Sovereign Wealth Fund के नियम बदलेंगे : पाकिस्तान के Sovereign Wealth Fund (SWF) से जुड़े कानून में भी संशोधन प्रस्तावित हैं। IMF के मुताबिक प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य SWF के कानूनी mandate को स्पष्ट करना, governance मजबूत करना और सरकारी कंपनियों से जुड़े accountability standards को बेहतर बनाना है। इसमें divestment और procurement के लिए पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रियाओं से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।
ऊर्जा क्षेत्र सबसे बड़ी चुनौतियों में : पाकिस्तान के IMF कार्यक्रम में energy sector viability को प्रमुख प्राथमिकता दी गई है। IMF के अनुसार बिजली और गैस क्षेत्र में वित्तीय स्थिरता बहाल करना, लागत-वसूली के अनुरूप टैरिफ व्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र की अक्षमताओं को कम करना सुधार एजेंडे का हिस्सा है। इसका सीधा असर भविष्य में ऊर्जा कीमतों, सब्सिडी और सरकारी वित्त पर पड़ सकता है।
सरकारी वित्त और गवर्नेंस : 174 संशोधनों का एक बड़ा हिस्सा financial governance और accountability से संबंधित बताया गया है। IMF के व्यापक कार्यक्रम में सार्वजनिक वित्त को मजबूत करना, सरकारी संस्थानों की पारदर्शिता बढ़ाना और सार्वजनिक क्षेत्र के संचालन में सुधार शामिल है।
संसद में होगी अगली बड़ी परीक्षा
वित्त सचिव के बयान के मुताबिक सरकार इन संशोधनों को संसद में मंजूरी के लिए पेश करेगी। यानी अब मामला सिर्फ IMF और पाकिस्तान सरकार के बीच बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रस्तावित कानूनी बदलावों को पाकिस्तान की संसदीय प्रक्रिया से भी गुजरना होगा। यही वजह है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान की संसद में IMF reforms बड़ा मुद्दा बन सकते हैं।
IMF की शर्तें क्यों महत्वपूर्ण हैं ?
पाकिस्तान का मौजूदा IMF कार्यक्रम सिर्फ तत्काल वित्तीय सहायता देने तक सीमित नहीं है। IMF ने इसके साथ macro-economic stability, tax reforms, SOE reforms, energy sector, social protection, human capital और anti-corruption measures को भी जोड़ा है। इसका मतलब है कि पाकिस्तान को मिलने वाली वित्तीय सहायता के साथ-साथ आर्थिक नीतियों और संस्थागत ढांचे में भी बदलाव की प्रक्रिया जारी है।
आगे क्या होगा ?
अब पाकिस्तान सरकार प्रस्तावित 174 संशोधनों पर काम कर रही है। इसके बाद इन बदलावों को संसद में रखा जाना है। वहीं 28 सितंबर 2026 से IMF मिशन की अगली समीक्षा प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस समीक्षा में यह देखा जाएगा कि पाकिस्तान ने IMF कार्यक्रम के तहत तय सुधारों में कितनी प्रगति की है। IMF के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक पाकिस्तान के कार्यक्रम में सुधारों की प्रगति को लगातार reviews और policy commitments के आधार पर देखा जा रहा है। इसलिए 174 संशोधन सिर्फ एक संख्या नहीं हैं; ये पाकिस्तान के टैक्स सिस्टम, ऊर्जा क्षेत्र, सरकारी कंपनियों और वित्तीय governance में प्रस्तावित व्यापक बदलावों का संकेत हैं।




