वॉशिंगटन डीसी, 24 सितंबर 2026 : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 साल बाद अमेरिका पहुंचे हैं। वॉशिंगटन में उनका स्वागत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने खुद Joint Base Andrews एयरपोर्ट पर किया। राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रम्प भी मौजूद थीं, जबकि शी जिनपिंग के साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन थीं। विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का इस तरह एयरपोर्ट पर व्यक्तिगत रूप से पहुंचना बेहद दुर्लभ माना जाता है। शी जिनपिंग की यह तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार, तकनीक और Geopolitics को लेकर कई अहम मुद्दे मौजूद हैं। गुरुवार यानी 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में दोनों नेताओं के बीच बातचीत होनी है और शाम को शी जिनपिंग तथा पेंग लियुआन के सम्मान में स्टेट डिनर भी आयोजित किया जाएगा। व्हाइट हाउस के मुताबिक, इस यात्रा में औपचारिक स्वागत समारोह, सैन्य सम्मान और स्टेट डिनर समेत कई कार्यक्रम शामिल हैं।
ट्रम्प ने रेड कार्पेट पर किया शी जिनपिंग का स्वागत
Joint Base Andrews पर शी जिनपिंग के स्वागत के लिए रेड कार्पेट बिछाया गया। अमेरिकी और चीनी झंडों के बीच सैन्य बैंड ने दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाए। इसके बाद ट्रम्प और शी जिनपिंग ने साथ खड़े होकर स्वागत समारोह में हिस्सा लिया। स्वागत समारोह के दौरान दो B-1 बॉम्बर विमानों ने फ्लाईपास्ट किया। तेज आवाज के दौरान ट्रम्प के चेहरे के हावभाव चर्चा में रहे, जबकि शी जिनपिंग शांत खड़े दिखाई दिए।
Trade War पर बड़ा अपडेट : ट्रूस जनवरी तक बढ़ा
ट्रम्प-शी मुलाकात से पहले अमेरिका और चीन के बीच एक अहम आर्थिक सहमति बनी है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक दोनों देशों ने मौजूदा Trade Truce को करीब दो महीने बढ़ाकर 10 जनवरी 2027 तक करने पर सहमति जताई है। यह ट्रूस पहले 10 नवंबर 2026 को खत्म होना था। अब दोनों देशों को व्यापक आर्थिक समझौते पर आगे बातचीत के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका-चीन के बीच सभी व्यापारिक विवाद खत्म हो गए हैं। Tariffs, Rare Earths, Agricultural Products और Market Access जैसे मुद्दे अभी बातचीत के केंद्र में हैं।
AI बनेगा अगला बड़ा मुद्दा
अमेरिका और चीन के बीच Artificial Intelligence को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। AI चिप्स, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और AI मॉडल दोनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं। अमेरिका चीन को अत्याधुनिक AI चिप्स और कुछ संवेदनशील तकनीकों तक पहुंच को लेकर प्रतिबंध लगाता रहा है, जबकि चीन इन प्रतिबंधों का विरोध करता है। सितंबर में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच AI पर अलग संवाद शुरू करने को लेकर सहमति बनी है। ऐसे में ट्रम्प-शी वार्ता में AI Safety, Technology Controls और AI Chips जैसे मुद्दों पर चर्चा अहम हो सकती है।
Taiwan पर भी रहेगी नजर
Taiwan अमेरिका और चीन के रिश्तों का सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान के साथ सुरक्षा और रक्षा सहयोग बनाए रखता है। बीजिंग चाहता है कि अमेरिका ताइवान को हथियारों की बिक्री और सैन्य समर्थन सीमित करे। वहीं, वॉशिंगटन के लिए ताइवान से जुड़ी सुरक्षा नीति एशिया-प्रशांत क्षेत्र की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसलिए ट्रम्प-शी बातचीत में ताइवान को लेकर दोनों देशों के रुख पर खास नजर रहेगी।
रूस और ईरान का मुद्दा भी अहम
अमेरिका-चीन बातचीत का एजेंडा केवल व्यापार और तकनीक तक सीमित नहीं है। रूस और ईरान से जुड़े मुद्दे भी दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित कर रहे हैं। चीन रूस के साथ अपने ऊर्जा और आर्थिक संबंध बनाए हुए है। वहीं अमेरिका रूस और ईरान से जुड़े मुद्दों पर चीन की भूमिका को लेकर दबाव बनाता रहा है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान, ताइवान, AI और Trade—चारों मुद्दे ट्रम्प-शी बातचीत में महत्वपूर्ण रह सकते हैं।
एक साल से भी कम समय में तीसरी मुलाकात
ट्रम्प और शी जिनपिंग की यह मौजूदा अमेरिकी यात्रा के दौरान तीसरी आमने-सामने मुलाकात है। दोनों नेता इससे पहले भी 2025 और 2026 में मिल चुके हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, लेकिन हालिया बातचीत का एक प्रमुख उद्देश्य संबंधों में और गिरावट को रोकना तथा आर्थिक तनाव को नियंत्रित रखना भी है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर ?
अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों में बदलाव का असर भारत समेत पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। सबसे पहले असर Global Trade और Supply Chain पर दिखाई दे सकता है। अगर दोनों देशों के बीच टैरिफ और व्यापारिक तनाव कम होता है, तो कंपनियों के लिए अमेरिका-चीन व्यापार का माहौल बदल सकता है। दूसरा अहम क्षेत्र तेल और ऊर्जा है। चीन और भारत दोनों रूस से ऊर्जा खरीदते हैं। ऐसे में रूस से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों या टैरिफ नीति में बदलाव का असर भारत की ऊर्जा लागत और व्यापार पर भी पड़ सकता है। तीसरा बड़ा मुद्दा AI और Semiconductor है। अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अगर AI चिप्स और सेमीकंडक्टर से जुड़े नियम बदलते हैं, तो इसका असर वैश्विक टेक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। यानी ट्रम्प और शी जिनपिंग की यह मुलाकात सिर्फ अमेरिका और चीन के रिश्तों तक सीमित नहीं है। व्यापार, AI, Chips, ताइवान, रूस और Global Supply Chain से जुड़े फैसलों का असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।




