सहारनपुर, 6 सितंबर। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में कथित अवैध मस्जिद और उसके ध्वस्तीकरण को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं, जबकि बीजेपी की ओर से इसे अवैध निर्माण के खिलाफ की गई कानूनी कार्रवाई बताया जा रहा है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत कई विपक्षी नेताओं ने प्रशासन से पूरी प्रक्रिया और कार्रवाई से जुड़े तथ्यों पर स्पष्टता की मांग की है।
इमरान मसूद ने निष्पक्ष प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि ऐसे मामलों में सभी पक्षों को कानून और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में रहकर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई और उससे जुड़े तथ्यों को लेकर सवाल उठाते हुए पूरे मामले में निष्पक्षता और पारदर्शिता की मांग की।
अखिलेश, राहुल और ओवैसी समेत कई नेताओं की प्रतिक्रिया
मामले को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी समेत कई विपक्षी नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है। इन नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद सहारनपुर का यह स्थानीय मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है।
संगीत सोम ने कहा- मस्जिद नहीं, अवैध निर्माण हटाया
बीजेपी नेता संगीत सोम ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सहारनपुर में किसी मस्जिद को नहीं गिराया गया, बल्कि अवैध जमीन पर बने अवैध निर्माण को हटाया गया है। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान निर्माण के नीचे करीब 400 साल पुराना कुआं भी मिला।
विपक्ष पर लगाया राजनीतिक माहौल बिगाड़ने का आरोप
संगीत सोम ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता इस मामले को राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी, अखिलेश यादव और ओवैसी पर मुस्लिम राजनीति करने का आरोप लगाया और बिजली कनेक्शन से जुड़े दावों पर भी सवाल खड़े किए।
पुराने दंगों का भी किया जिक्र
संगीत सोम ने 2013 के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दंगों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक ताकतें क्षेत्र में फिर तनाव का माहौल बनाना चाहती हैं। हालांकि, उनके लगाए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है।
कार्रवाई के बाद बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
फिलहाल सहारनपुर प्रकरण में एक ओर विपक्ष प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, वहीं बीजेपी इसे अवैध निर्माण के खिलाफ कानून के तहत की गई कार्रवाई बता रही है। मामले में प्रशासनिक पक्ष और उपलब्ध दस्तावेज सामने आने के बाद ही पूरे विवाद की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।




