लखनऊ, 30 अगस्त। उत्तर प्रदेश और ओडिशा के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों काशी और पुरी को बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए एक बड़े पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की तैयारी है। दोनों राज्यों के पर्यटन एवं संस्कृति विभागों ने इसके लिए साझा रणनीति पर काम शुरू किया है। योजना के तहत काशी-पुरी का संयुक्त टूर पैकेज तैयार किया जाएगा, जिससे पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने के साथ होटल, परिवहन, गाइड, खानपान और हस्तशिल्प जैसे स्थानीय कारोबार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

काशी-पुरी को जोड़ने की तैयारी

भगवान शिव की नगरी काशी और भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी को स्पिरिचुअल टूरिज्म सर्किट से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल काशी और पुरी के बीच हवाई सेवा के साथ कई ट्रेनें उपलब्ध हैं। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर रेल कनेक्टिविटी को और बेहतर करने के लिए केंद्र सरकार और रेलवे से संपर्क किया जा सकता है।

पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद

पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के विकास के बाद वाराणसी में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। वहीं, ओडिशा में पुरी जगन्नाथ मंदिर के अलावा भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर और कोणार्क जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल भी बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करते हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से दोनों राज्यों के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है।

तैयार होगा संयुक्त टूर पैकेज

पर्यटन विभाग टूर ऑपरेटरों के लिए काशी-पुरी का संयुक्त पैकेज तैयार करने की योजना बना रहा है। इसमें पुरी के साथ कोणार्क सूर्य मंदिर, रत्नागिरी, उदयगिरि, ललितगिरि, चिल्का, भीतरकनिका और सिमिलिपाल जैसे प्रमुख स्थलों को भी शामिल किया जा सकता है।

होटल से हस्तशिल्प तक मिलेगा फायदा

अधिकारियों का अनुमान है कि बेहतर कनेक्टिविटी से दोनों क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। इससे होटल, होमस्टे, परिवहन, स्थानीय गाइड और खानपान सेवाओं की मांग बढ़ेगी। साथ ही बनारसी साड़ी, ओडिशा की पट्टचित्र कला और अन्य स्थानीय उत्पादों के लिए भी नया बाजार तैयार हो सकता है। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।