लखनऊ, 11 सितंबर। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयुष छात्र-छात्राओं ने शुक्रवार को स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर बारिश के बीच जुटे छात्रों ने सरकार से मौजूदा 7,500 रुपये के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मांग की। छात्रों का कहना है कि वर्ष 2011 से स्टाइपेंड में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि इस दौरान महंगाई काफी बढ़ गई है।

बारिश में भी नहीं रुका छात्रों का प्रदर्शन

बारिश के बावजूद छात्र गांधी प्रतिमा पर डटे रहे। कई छात्र छाता लेकर पहुंचे, जबकि कुछ पोस्टर सिर पर रखकर बारिश से बचते हुए नारेबाजी करते रहे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर अलग-अलग नारे लिखे पोस्टर भी दिखाए।

15 साल से 7,500 रुपये का स्टाइपेंड

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वर्ष 2011 से उन्हें 7,500 रुपये का स्टाइपेंड मिल रहा है। छात्रों के मुताबिक, आयुर्वेद की पढ़ाई के बाद इंटर्नशिप के दौरान अस्पताल और मरीजों से जुड़े काम भी करने पड़ते हैं। इसके बावजूद स्टाइपेंड में लंबे समय से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।

रोज करीब 250 रुपये के हिसाब से भुगतान

छात्रों के अनुसार 7,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड के हिसाब से करीब 250 रुपये प्रतिदिन पड़ते हैं। किराया, खाना, यात्रा और पढ़ाई से जुड़े खर्चों को देखते हुए यह राशि कम पड़ रही है। छात्रों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना जरूरी है।

एमबीबीएस इंटर्न के बराबर स्टाइपेंड की मांग

छात्रों ने दावा किया कि एमबीबीएस इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया जा चुका है। उनका कहना है कि आयुष इंटर्न भी अस्पतालों में मरीजों से जुड़े काम करते हैं, इसलिए उनके स्टाइपेंड में भी समान स्तर पर बढ़ोतरी होनी चाहिए।

25 हजार रुपये करने की मांग

आयुष छात्रों ने सरकार से मौजूदा 7,500 रुपये के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की मांग दोहराई। छात्रों का कहना है कि उनकी मांग कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि पढ़ाई और इंटर्नशिप के दौरान जरूरी खर्चों को देखते हुए उचित सहायता की मांग है।

सरकार से जल्द फैसले की उम्मीद

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचा रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक वे अपनी मांग को उठाते रहेंगे। छात्रों की नजर अब सरकार की ओर से आने वाले फैसले पर है।