लखनऊ, 30 अगस्त। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देशभर में लोग जातीय जनगणना की मांग कर रहे हैं, ताकि विभिन्न सामाजिक वर्गों की आबादी की वास्तविक संख्या सामने आ सके। अखिलेश यादव ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर तीन महीने के भीतर जातीय जनगणना कराने का संकल्प लिया जाएगा।

आबादी के अनुपात में हक दिलाने का दावा

अखिलेश यादव ने कहा कि जातीय जनगणना से अलग-अलग सामाजिक वर्गों की वास्तविक आबादी का आंकड़ा सामने आएगा। उनके मुताबिक, इन आंकड़ों के आधार पर आबादी के अनुपात में लोगों को उनका अधिकार, हिस्सेदारी और सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों की संख्या की सही जानकारी होने से नीतियां और योजनाएं तैयार करने में भी मदद मिल सकती है। जातीय जनगणना को उन्होंने सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दे के तौर पर पेश किया।

मौजूदा सरकार पर साधा निशाना

सपा प्रमुख ने कहा कि अगर मौजूदा सरकार जातीय जनगणना नहीं कराती है, तो समाजवादी पार्टी सत्ता में आने के बाद इस दिशा में तेजी से काम करेगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार बनने के तीन महीने के भीतर जातीय जनगणना कराने का प्रयास किया जाएगा।

अधिकार और सम्मान की बात

अखिलेश यादव ने कहा कि जातीय जनगणना का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि आबादी के अनुपात में विभिन्न वर्गों को उनका अधिकार और सम्मान दिलाना होना चाहिए। उन्होंने सामाजिक हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व के सवाल को भी इससे जोड़ते हुए अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई।

जातीय जनगणना पर जारी है राजनीतिक बहस

देश में जातीय जनगणना लंबे समय से राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा रही है। विभिन्न राजनीतिक दल इसे सामाजिक और आर्थिक नीतियों के लिए जरूरी आंकड़े जुटाने का माध्यम बताते रहे हैं। वहीं, इसके तौर-तरीकों और आंकड़ों के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग मत भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव का यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय जनगणना के मुद्दे को फिर चर्चा के केंद्र में ला सकता है।