लखनऊ, 15 सितंबर। राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन में पंचायत सहायकों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। आंदोलन कर रहे पंचायत सहायकों ने सरकार से मौजूदा मानदेय बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रति माह करने समेत सेवा से जुड़े अधिकारों पर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि गांवों में लगातार बढ़ रही जिम्मेदारियों के मुकाबले वर्तमान मानदेय बेहद कम है।

6 हजार रुपये मानदेय में काम करने का दावा

पंचायत सहायकों के अनुसार उन्हें फिलहाल करीब 6 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच इतनी राशि में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है। इसी वजह से वे लंबे समय से मानदेय में बढ़ोतरी की मांग उठा रहे हैं।

करीब 29 विभागों से जुड़े काम का हवाला

धरने पर बैठे पंचायत सहायकों का कहना है कि वे गांवों में कई सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और ग्रामीणों से जुड़े प्रशासनिक काम में सहयोग करते हैं। उनके मुताबिक, करीब 29 विभागों से संबंधित कार्यों में उनकी भूमिका रहती है। ऐसे में जिम्मेदारियों और काम के दायरे को देखते हुए सम्मानजनक मानदेय तय किया जाना चाहिए।

मानदेय बढ़ाने के साथ अधिकारों की मांग

आंदोलनकारियों ने केवल मानदेय बढ़ाने की मांग ही नहीं की है, बल्कि सेवा से जुड़े अधिकारों और भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की भी मांग रखी है। उनका कहना है कि काम की प्रकृति, जिम्मेदारी और योगदान के अनुरूप उनकी सेवा शर्तों को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

ईको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरना

पंचायत सहायकों का कहना है कि सरकार की ओर से ठोस निर्णय मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। ईको गार्डन में चल रहे धरने के दौरान वे अपनी मांगों को लेकर लगातार सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द सकारात्मक फैसला करेगी।

सम्मानजनक मानदेय की मांग पर अड़े पंचायत सहायक

पंचायत सहायकों ने कहा कि गांव स्तर पर सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में उन्हें सिर्फ मानदेय पाने वाला कर्मचारी नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था में योगदान देने वाले कर्मियों के तौर पर देखा जाना चाहिए। अब उनकी नजर सरकार के अगले कदम और मानदेय बढ़ाने को लेकर होने वाले निर्णय पर टिकी है।