लखनऊ, 17 सितंबर। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई है। इसी बीच 2024 लोकसभा चुनाव के विधानसभा-क्षेत्रवार आंकड़े चर्चा में हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मई 2026 से अब तक प्रदेश के 75 में से 44 से अधिक जिलों का दौरा कर चुके हैं। इन दौरों में करीब 115 विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी 38,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास किया गया है।
115 सीटों में 2024 का क्या था गणित?
2024 लोकसभा चुनाव के दौरान इन 115 विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों में सपा-कांग्रेस गठबंधन 67 सीटों पर आगे रहा था। इनमें समाजवादी पार्टी 54 और कांग्रेस 13 सीटों पर आगे थी। वहीं बीजेपी 47 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही, जबकि उसकी सहयोगी आरएलडी एक सीट पर आगे थी।
विकास परियोजनाओं पर क्यों है जोर?
रिपोर्ट के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ के दौरे के दौरान 115 विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं का कुल मूल्य 38,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें सड़क, स्कूल, अस्पताल, बिजली, पानी, पंचायत भवन, पर्यटन और कौशल विकास जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। कई कार्यक्रमों में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सहायता भी वितरित की गई।
2024 के आंकड़े क्या बताते हैं?
2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को 33 लोकसभा सीटें मिली थीं, जबकि समाजवादी पार्टी ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटें जीती थीं। इन नतीजों के विधानसभा-वार आंकड़ों ने राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में दलों की स्थिति की एक तस्वीर पेश की थी।
क्या 115 सीटों का आंकड़ा 2027 का संकेत है?
इन 115 विधानसभा क्षेत्रों में 2024 का प्रदर्शन आगामी विधानसभा चुनाव का नतीजा नहीं माना जा सकता। 2027 तक उम्मीदवार, गठबंधन, स्थानीय मुद्दे, सामाजिक समीकरण और राजनीतिक परिस्थितियां बदल सकती हैं। इसलिए 2024 के लोकसभा चुनाव के विधानसभा-वार आंकड़ों को मौजूदा राजनीतिक स्थिति के संदर्भ में एक पिछला चुनावी डेटा-पॉइंट माना जाना चाहिए, न कि भविष्य के परिणाम की भविष्यवाणी।
अखिलेश यादव के लिए भी अहम है यह डेटा
समाजवादी पार्टी के लिहाज से 67 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त का आंकड़ा 2024 के लोकसभा चुनाव में उसके गठबंधन के प्रदर्शन को दर्शाता है। वहीं बीजेपी के लिए इन क्षेत्रों में चल रही विकास परियोजनाएं और जनसंपर्क कार्यक्रम आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा हैं। इन दोनों पहलुओं को साथ रखकर ही 2027 की राजनीतिक तस्वीर को समझा जा सकता है।




