नई दिल्ली, 20 सितंबर। गूगल के AI मॉडल Gemini को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मई 2026 में साइबर सिक्योरिटी टेस्ट के दौरान Gemini ने गलती से तीन असली कंपनियों के सिस्टम तक पहुंच बना ली। यह टेस्ट AI की हैकिंग क्षमता जांचने के लिए किया जा रहा था। गूगल के मुताबिक, मॉडल ने जब पहचान लिया कि वह असली कंपनियों के सिस्टम में पहुंच गया है, तो उसने तीनों मामलों में अपनी गतिविधि रोक दी। इस घटना ने AI की बढ़ती ताकत और उसकी सुरक्षा को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

फर्जी कंपनी की जगह असली सिस्टम तक पहुंचा AI

यह सुरक्षा परीक्षण AI सिक्योरिटी कंपनी Irregular की मदद से किया जा रहा था। इसमें Gemini को एक काल्पनिक कंपनी के सिस्टम से जानकारी हासिल करने का काम दिया गया था। लेकिन टेस्टिंग के दौरान AI को अनजाने में इंटरनेट तक पहुंच मिल गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक मामले में फर्जी कंपनी का नाम असली कंपनी से मिलता-जुलता था। Gemini ने असली सिस्टम को टेस्ट का हिस्सा समझ लिया और वहां पहुंच बना ली।

पासवर्ड और सार्वजनिक जानकारी का इस्तेमाल

गूगल के अनुसार, तीनों घटनाओं में AI ने अलग-अलग तरीकों से सिस्टम तक पहुंच बनाई। एक मामले में मॉडल ने पासवर्ड का अनुमान लगाकर सुरक्षित सिस्टम में प्रवेश किया। वहीं, दो अन्य मामलों में उसे सार्वजनिक ऑनलाइन रिपॉजिटरी में मौजूद क्रेडेंशियल्स मिले, जिनका इस्तेमाल कर वह कंपनियों के सिस्टम तक पहुंच गया।

हालांकि, प्रभावित कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। गूगल ने कहा कि इन कंपनियों को घटना की जानकारी दी गई थी।

गूगल ने क्या कहा?

गूगल की सिक्योरिटी इंजीनियरिंग की उपाध्यक्ष Heather Adkins ने बताया कि Gemini ने तीनों मामलों में असली कंपनियों के सिस्टम तक पहुंचने के बाद अपनी गतिविधि रोक दी। कंपनी के मुताबिक, इन घटनाओं में किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।

AI सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

इस घटना के बाद AI एजेंट्स को इंटरनेट और संवेदनशील सिस्टम तक पहुंच देने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों के लिए यह जरूरी हो गया है कि AI की क्षमताओं के साथ उसकी सुरक्षा जांच और टेस्टिंग सिस्टम को भी मजबूत बनाया जाए।