नई दिल्ली, 27 सितंबर। LPU से जुड़े हालिया विवाद के बीच कॉलेज कैंपस में छात्राओं की सुरक्षा और शिकायत व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज है। किसी घटना या आरोप की पुष्टि से अलग, यह जानना जरूरी है कि अगर किसी छात्रा के साथ छेड़खानी, यौन उत्पीड़न या पीछा करने जैसी घटना होती है तो वह कहां शिकायत कर सकती है और संस्थान की क्या जिम्मेदारी होती है।

सबसे पहले अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें

अगर कैंपस में किसी छात्रा को खतरा महसूस हो तो सबसे पहले सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए। आपात स्थिति में पुलिस की मदद के लिए 112 पर संपर्क किया जा सकता है। छात्राएं उपलब्ध महिला हेल्पलाइन की जानकारी भी अपने राज्य या स्थानीय प्रशासन से ले सकती हैं।

घटना के बाद चैट, मैसेज, फोटो, वीडियो या अन्य डिजिटल सबूत सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। तारीख, समय, स्थान और घटना के संभावित गवाहों की जानकारी भी नोट कर लेनी चाहिए।

कॉलेज की ICC में कर सकती हैं शिकायत

उच्च शिक्षण संस्थानों में यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए Internal Complaints Committee (ICC) की व्यवस्था होती है। छात्राएं अपने विश्वविद्यालय की वेबसाइट, छात्र पोर्टल या प्रशासन से ICC के सदस्यों और शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया की जानकारी ले सकती हैं।

अगर मामला आपराधिक प्रकृति का है तो कॉलेज की आंतरिक प्रक्रिया के साथ पुलिस में शिकायत करना भी जरूरी हो सकता है।

छेड़खानी को हल्के में न लें

भारतीय कानून में यौन उत्पीड़न और महिलाओं के खिलाफ कई तरह के अनुचित व्यवहार को अपराध माना गया है। बिना सहमति यौन प्रकृति का शारीरिक संपर्क, अश्लील सामग्री दिखाना या यौन प्रकृति की अनुचित टिप्पणियां गंभीर मामला हो सकती हैं।

कॉलेज प्रशासन की क्या जिम्मेदारी है?

संस्थान की जिम्मेदारी केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं है। कॉलेज को शिकायत की स्पष्ट व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए, ICC की जानकारी छात्रों तक पहुंचानी चाहिए और सुरक्षित कैंपस के लिए जरूरी सुरक्षा व जागरूकता उपाय करने चाहिए।

शिकायत करने वाली छात्रा की गोपनीयता, सुरक्षा और सम्मान का ध्यान रखना भी जरूरी है। उसे शिकायत करने से रोकना, शर्मिंदा करना या मामले को दबाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

ऐसी स्थिति में छात्राओं को अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उपलब्ध संस्थागत और कानूनी शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल करना चाहिए।