लंदन, 16 सितंबर। इंग्लैंड में चल रही काउंटी चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने बल्ले और गेंद दोनों से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। मयंक अग्रवाल ने 177 रन की शानदार पारी खेलकर डरहम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया, जबकि सरे के लिए खेल रहे आकिब नबी ने 4 विकेट लेकर ग्लेमॉर्गन की पहली पारी को 132 रन पर समेटने में अहम भूमिका निभाई। जयदेव उनादकट और आर. साई किशोर ने भी गेंद से प्रभाव छोड़ा।
मयंक अग्रवाल ने खेली 177 रन की पारी
डरहम की ओर से खेल रहे कर्नाटक के बल्लेबाज मयंक अग्रवाल ने वॉर्सेस्टरशायर के खिलाफ 220 गेंदों में 177 रन बनाए। यह काउंटी क्रिकेट में उनका अब तक का सबसे बड़ा स्कोर बताया गया। उनकी पारी ने डरहम को पहली पारी में बड़े स्कोर की ओर पहुंचाया।
मयंक के साथ बेन स्टोक्स की तेज अर्धशतकीय पारी ने भी टीम का स्कोर बढ़ाने में मदद की। पहले दिन का खेल खत्म होने तक डरहम ने 7 विकेट पर 437 रन बना लिए थे।
आकिब नबी ने चार विकेट लेकर मचाई धूम
सरे के लिए खेल रहे आकिब नबी ने ग्लेमॉर्गन के खिलाफ शानदार गेंदबाजी की। उन्होंने 36 रन देकर 4 विकेट लिए और विरोधी टीम की पहली पारी 132 रन पर समेटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दूसरी पारी में भी उन्होंने गेंदबाजी की, जहां चार ओवर में सिर्फ 11 रन दिए, हालांकि उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। बल्लेबाजी में नबी खाता नहीं खोल सके और तीन गेंदों का सामना किया।
जयदेव उनादकट ने भी दिखाया असर
ससेक्स के लिए खेल रहे भारतीय तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट ने नॉटिंघमशायर के खिलाफ 82 रन देकर 3 विकेट लिए। उनकी गेंदबाजी के सामने नॉटिंघमशायर की टीम 9 विकेट पर 232 रन तक पहुंच सकी।
इसी मुकाबले में भारतीय बल्लेबाज मुकेश कुमार ने अभी सिर्फ तीन गेंदों का सामना किया है और वह बिना खाता खोले नाबाद बताए गए हैं।
साई किशोर और मैनव सुथार का योगदान
ग्लॉस्टरशायर के लिए खेल रहे आर. साई किशोर ने 54 रन देकर 2 विकेट हासिल किए। वहीं वारविकशायर के लिए खेल रहे मैनव सुथार ने गेंदबाजी में 28 रन दिए, लेकिन कोई विकेट नहीं मिला। बल्लेबाजी में उन्होंने 12 गेंदों पर 9 रन बनाए।
भारतीय खिलाड़ियों का काउंटी में जलवा
काउंटी चैंपियनशिप के इस दौर में भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग टीमों के लिए अहम योगदान दिया है। मयंक अग्रवाल की बड़ी पारी और आकिब नबी की चार विकेट की गेंदबाजी सबसे ज्यादा चर्चा में रही, जबकि उनादकट और साई किशोर ने भी अपनी टीमों को महत्वपूर्ण सहयोग दिया। इससे काउंटी क्रिकेट में भारतीय खिलाड़ियों की लगातार भागीदारी और प्रभाव एक बार फिर देखने को मिला।




