5 जुलाई 2026
पटना: बिहार में खेल प्रतिभाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्पोर्ट्स मेडिसिन (Sports Medicine) के विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति शुरू कर दी है। इस पहल का उद्देश्य खिलाड़ियों को खेल के दौरान लगने वाली चोटों का आधुनिक और समय पर इलाज उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें उपचार के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।
सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और करियर की सुरक्षा करेगा, बल्कि बिहार में खेल संस्कृति को भी नई मजबूती देगा। हाल के वर्षों में राज्य में स्पोर्ट्स एकेडमी, खेल विश्वविद्यालय और खेल अवसंरचना के विस्तार के बाद अब चिकित्सा सुविधाओं को भी उसी स्तर पर विकसित किया जा रहा है।
12 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हुई डॉक्टरों की नियुक्ति
स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के 12 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल 446 सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर की नियुक्ति की है। इनमें विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ स्पोर्ट्स मेडिसिन के डॉक्टर भी शामिल हैं।
इन नियुक्तियों का उद्देश्य मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ सेवाओं को मजबूत करना और खिलाड़ियों को चोट लगने की स्थिति में तत्काल गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है।
पावापुरी वीआईएमएस को मिले तीन स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञ
नालंदा जिले के भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान (VIMS), पावापुरी में स्पोर्ट्स मेडिसिन के तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है। यह राज्य का ऐसा प्रमुख संस्थान होगा जहां खिलाड़ियों को खेल संबंधी चोटों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि खेलों के दौरान मांसपेशियों, हड्डियों, लिगामेंट, टेंडन और जोड़ों में होने वाली चोटों के इलाज के लिए स्पोर्ट्स मेडिसिन बेहद महत्वपूर्ण शाखा है। समय पर उपचार मिलने से खिलाड़ी जल्दी मैदान पर वापसी कर सकते हैं।
अब दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम
अब तक गंभीर खेल चोटों के मामलों में बिहार के खिलाड़ियों को दिल्ली, पटना के बाहर या अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों का सहारा लेना पड़ता था। इससे इलाज में देरी होने के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ता था।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य में ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे खिलाड़ियों को तेजी से इलाज मिलेगा और उन्हें बाहर जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाएगी।
671 नए हड्डी रोग विशेषज्ञों के पद भी सृजित
स्वास्थ्य विभाग ने केवल स्पोर्ट्स मेडिसिन तक ही सीमित न रहते हुए 671 नए आर्थोपेडिक (हड्डी रोग विशेषज्ञ) पदों का भी सृजन किया है।
इन पदों पर नियुक्तियां पूरी होने के बाद जिला स्तर तक हड्डी और खेल संबंधी चोटों का बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे खिलाड़ियों के अलावा सड़क दुर्घटना, दुर्घटनाओं और अन्य गंभीर हड्डी संबंधी मरीजों को भी फायदा मिलेगा।
इन मेडिकल कॉलेजों को मिला सबसे अधिक लाभ
सरकार द्वारा जिन मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर की नियुक्ति की गई है, उनमें प्रमुख रूप से—
- पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH)
- नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NMCH)
- भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान (VIMS), पावापुरी
- मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज
- भागलपुर मेडिकल कॉलेज
- गया मेडिकल कॉलेज
- दरभंगा मेडिकल कॉलेज
- मधेपुरा मेडिकल कॉलेज
- बेतिया मेडिकल कॉलेज
- पूर्णिया मेडिकल कॉलेज
- समस्तीपुर मेडिकल कॉलेज
- छपरा मेडिकल कॉलेज
शामिल हैं।
इन संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई मजबूती मिलेगी।
खिलाड़ियों को मिलेगा आधुनिक उपचार
स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञ खिलाड़ियों की चोटों का केवल उपचार ही नहीं करते, बल्कि उनकी फिटनेस, पुनर्वास (Rehabilitation), चोट से बचाव और प्रदर्शन सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सरकार का मानना है कि आधुनिक खेल चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने से राज्य के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की बेहतर तैयारी कर सकेंगे।
खेल और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह पहल केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगी। मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से आम मरीजों को भी बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी।
सरकार का लक्ष्य बिहार में ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करना है जहां खेल प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा राज्य के भीतर ही उपलब्ध हो। इससे बिहार में खेल संस्कृति, चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं—तीनों क्षेत्रों को एक साथ मजबूती मिलने की उम्मीद है।




