कोलकाता, 18 सितंबर। पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम यानी PMOS, जिसे पहले PCOS कहा जाता था, महिलाओं में हार्मोन, मेटाबॉलिज्म और रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जुड़ी एक जटिल स्थिति है। 12 मई 2026 से इस स्थिति के लिए PMOS नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें अनियमित पीरियड्स, मुहांसे, शरीर पर अतिरिक्त बाल, वजन और इंसुलिन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
लाइफस्टाइल क्यों है जरूरी?
डॉ. रजनी बगई के मुताबिक PMOS को मैनेज करने में दवा के साथ खान-पान, शारीरिक गतिविधि और रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन भी PMOS में स्वस्थ खान-पान और नियमित फिजिकल एक्टिविटी को मुख्य प्रबंधन का हिस्सा मानती है। इसके फायदे केवल वजन कम करने तक सीमित नहीं हैं।
PMOS में कैसी डाइट अपनाएं?
PMOS के लिए कोई एक डाइट सबसे बेहतर साबित नहीं हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा संतुलित भोजन चुनना बेहतर है जिसे लंबे समय तक अपनाया जा सके। सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, प्रोटीन और उचित मात्रा में स्वस्थ वसा को रोज की डाइट में शामिल किया जा सकता है। बहुत ज्यादा प्रतिबंध वाली फैड डाइट से बचना बेहतर है।
कितनी एक्सरसाइज फायदेमंद है?
18 से 64 साल की महिलाओं के लिए सप्ताह में 150-300 मिनट मध्यम तीव्रता वाली या 75-150 मिनट तेज गतिविधि की सलाह दी जाती है। इसके साथ सप्ताह में दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज भी की जा सकती है। अधिक स्वास्थ्य लाभ या वजन घटाने के लक्ष्य में गतिविधि की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।
तनाव और बॉडी इमेज का भी रखें ध्यान
PMOS के लक्षणों के कारण कई महिलाओं में तनाव, कम आत्मविश्वास या शरीर को लेकर असहजता बढ़ सकती है। इसलिए लक्ष्य बहुत कठिन रखने के बजाय छोटे और टिकाऊ बदलाव करना बेहतर है। नियमित नींद, रोजाना सक्रिय रहना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।




