नई दिल्ली, 27 सितंबर। सहजन यानी मोरिंगा भारत के कई हिस्सों में रोजमर्रा के खाने का हिस्सा है। इसकी पत्तियों से लेकर फलियों और बीजों तक का इस्तेमाल अलग-अलग तरह से किया जाता है। पोषक तत्वों की मौजूदगी के कारण मोरिंगा को अक्सर बेहद उपयोगी पौधा माना जाता है। हालांकि, इसके स्वास्थ्य लाभों को लेकर किए गए दावों को संतुलित तरीके से समझना जरूरी है।
‘मिरेकल ट्री’ क्यों कहा जाता है मोरिंगा?
मोरिंगा को कई जगह ‘मिरेकल ट्री’ कहा जाता है। डायटीशियन भावेश गुप्ता के अनुसार, इसमें कई तरह के पोषक तत्व और जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। उन्होंने मोरिंगा में एंटीऑक्सीडेंट समेत कई संभावित गुणों का जिक्र किया। इसकी पत्तियों में विटामिन और मिनरल्स भी पाए जाते हैं, हालांकि इनकी मात्रा पौधे के हिस्से और उसकी स्थिति के अनुसार बदल सकती है।
प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन का स्रोत
सहजन की पत्तियों में प्रोटीन के साथ कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसकी हरी फलियों का इस्तेमाल दाल, सांभर और दूसरी भारतीय डिशेज में किया जाता है। वहीं, इसके बीजों से तेल भी तैयार किया जाता है।
पत्तियों से लेकर फलियों तक इस्तेमाल
सहजन की पत्तियों को सब्जी, साग, चटनी और पाउडर के रूप में खाया जाता है। इसकी फलियां भी भारतीय भोजन का हिस्सा हैं। यही खासियत मोरिंगा को दूसरे कई पौधों से अलग बनाती है, क्योंकि इसके अलग-अलग हिस्सों का भोजन में इस्तेमाल किया जा सकता है।
PM मोदी भी कर चुके हैं मोरिंगा का जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सहजन को अपनी डाइट में शामिल करने की बात सार्वजनिक रूप से बता चुके हैं। उन्होंने एक बातचीत में बताया था कि वह सहजन के पराठे खाते हैं और इसे हफ्ते में एक-दो बार अपनी डाइट में शामिल करते हैं।
संतुलित डाइट का रखें ध्यान
मोरिंगा पोषक तत्वों वाला खाद्य पदार्थ हो सकता है, लेकिन इसे किसी बीमारी का इलाज मानकर जरूरत से ज्यादा सेवन करना उचित नहीं है। संतुलित आहार में इसे शामिल करना बेहतर तरीका है। किसी स्वास्थ्य समस्या, एलर्जी या नियमित दवाओं की स्थिति में डाइट में बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह लेना चाहिए।




