दवा संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला

नई दिल्ली: कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दो प्रमुख कीमोथेरेपी दवाओं Cisplatin और Carboplatin की कीमतों में केंद्र सरकार ने बड़ी बढ़ोतरी की है। 11 जून 2026 को राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने विशेष प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए इन दवाओं की अधिकतम कीमत (Ceiling Price) में करीब 50 प्रतिशत तक वृद्धि को मंजूरी दी। दोनों दवाएं राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (NLEM) में शामिल हैं और कैंसर उपचार में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं।

कितनी बढ़ी दवाओं की कीमत?

NPPA की अधिसूचना के अनुसार, Cisplatin Injection की कीमत 7.26 रुपये प्रति मिलीलीटर से बढ़ाकर 10.89 रुपये प्रति मिलीलीटर कर दी गई है। वहीं Carboplatin Injection की कीमत 60.49 रुपये प्रति मिलीलीटर से बढ़कर 90.74 रुपये प्रति मिलीलीटर हो गई है। यह वृद्धि पिछले कई वर्षों में इन दवाओं की कीमतों में सबसे बड़े संशोधनों में से एक मानी जा रही है।

आखिर क्यों बढ़ानी पड़ी कीमत?

फार्मा कंपनियों और उद्योग संगठनों ने सरकार को बताया था कि इन दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली Platinum धातु की कीमतों में पिछले एक वर्ष के दौरान भारी उछाल आया है। इसके अलावा कच्चे माल, पैकेजिंग, परिवहन और ऊर्जा लागत में भी लगातार वृद्धि हुई है। कंपनियों का दावा था कि पुरानी कीमतों पर उत्पादन जारी रखना आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा था।

दवा की कमी से मरीजों को हुई परेशानी

वर्ष 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में देश के कई अस्पतालों में इन दवाओं की कमी की शिकायतें सामने आई थीं। कुछ कैंसर केंद्रों में मरीजों की कीमोथेरेपी तक प्रभावित हुई। भारत में हर साल 14 से 15 लाख नए कैंसर मरीजों के मामले सामने आते हैं और इनमें बड़ी संख्या में मरीजों के इलाज में Cisplatin तथा Carboplatin का उपयोग किया जाता है। इन दवाओं का इस्तेमाल फेफड़े, ओवरी, ब्लैडर, सिर एवं गर्दन तथा टेस्टिकुलर कैंसर के इलाज में किया जाता है।

किन कंपनियों पर पड़ेगा असर?

इस फैसले का असर Cipla, Intas Pharmaceuticals, Dr. Reddy’s Laboratories, Zydus Lifesciences, Venus Remedies और Naprod Life Sciences जैसी कंपनियों पर पड़ सकता है। बताया जाता है कि Naprod Life Sciences ने दवा लागत बढ़ने और सप्लाई संकट का हवाला देते हुए कीमत संशोधन की मांग भी उठाई थी।

मरीजों और बाजार पर क्या होगा प्रभाव?

विशेषज्ञों का मानना है कि कीमत बढ़ने से कंपनियां उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित होंगी और बाजार में दवाओं की उपलब्धता सुधर सकती है। हालांकि दूसरी ओर कैंसर मरीजों के इलाज का खर्च बढ़ने की आशंका भी है। ऐसे में सरकार पर जरूरतमंद मरीजों के लिए राहत योजनाओं को मजबूत करने का दबाव बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

11 जून 2026 को लिया गया यह फैसला दवा संकट को दूर करने और जीवनरक्षक कैंसर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कीमत बढ़ने के बाद दवाओं की सप्लाई कितनी तेजी से सामान्य होती है और इसका मरीजों की जेब पर कितना असर पड़ता है।