नई दिल्ली, 15 सितंबर। देश के अलग-अलग हिस्सों में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने से स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ी है। भोपाल में सितंबर के पहले दो हफ्तों में 46 संक्रमण रिपोर्ट हुए हैं। वहीं, नैनीताल जिले में भी स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बढ़ाई गई है और स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
नैनीताल में H1N1 को लेकर बढ़ी निगरानी
नैनीताल जिले में मौसमी संक्रमणों के बीच स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। हालिया रिपोर्टों में जिले में H1N1 के मामलों और मौतों का दावा किया गया है, लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों से 18 पॉजिटिव और 4 मौतों के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी। इसलिए इन आंकड़ों को आधिकारिक पुष्टि के बिना अंतिम संख्या नहीं माना जाना चाहिए।
भोपाल में सितंबर में 46 H1N1 केस
भोपाल में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार सितंबर के पहले दो हफ्तों में 46 H1N1 संक्रमण सामने आए हैं। 15 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से अब तक शहर में कुल 68 संक्रमण दर्ज किए जा चुके हैं। सितंबर में संक्रमण की रफ्तार बढ़ी है और नए मरीजों की निगरानी की जा रही है।
H1N1 क्या है?
H1N1 इन्फ्लूएंजा वायरस का एक प्रकार है, जो सांस से जुड़ी बीमारी पैदा करता है। इसके सामान्य लक्षणों में अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द और थकान शामिल हो सकते हैं। ज्यादातर लोग उचित देखभाल के साथ ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों में जटिलताओं का खतरा अधिक रहता है।
बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी
बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से अस्थमा, डायबिटीज या हृदय संबंधी बीमारी जैसी स्थितियों वाले लोगों में फ्लू की गंभीर जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जल्दी सलाह लेना बेहतर है।
कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?
सांस लेने में दिक्कत, सीने में लगातार दर्द या दबाव, भ्रम की स्थिति, तेज चक्कर, पेशाब कम होना, बहुत ज्यादा कमजोरी या ठीक होने के बाद बुखार-खांसी का दोबारा बढ़ना गंभीर चेतावनी संकेत हो सकते हैं। बच्चों में तेज सांस, होंठ या चेहरा नीला पड़ना, पानी की कमी, सुस्ती या दौरे जैसे लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
बदलते मौसम में सावधानी जरूरी
फ्लू संक्रमण से बचाव के लिए बीमार व्यक्ति से नजदीकी संपर्क कम रखना, हाथों की सफाई और खांसते-छींकते समय सावधानी जैसी सामान्य हाइजीन आदतें मददगार हो सकती हैं। लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।




