पटना, 16 सितंबर। हार्ट अटैक को लंबे समय तक उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन अब कम उम्र में भी दिल से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान बढ़ा है। 2025 में American Heart Association ने बताया कि कई युवा वयस्कों में ही हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल और टाइप-2 डायबिटीज जैसे हार्ट डिजीज के जोखिम कारक मौजूद हो सकते हैं। 2026 की एक AHA स्टडी में 55 साल से कम उम्र के लोगों में पहली बार गंभीर हार्ट अटैक के बाद अस्पताल में मृत्यु दर में 2011 से 2022 के बीच बढ़ोतरी भी दर्ज की गई।

कम उम्र में हार्ट अटैक की वजह क्या हो सकती है?

हार्ट अटैक का मुख्य कारण कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज से जुड़ी बीमारी है। धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी जोखिम बढ़ा सकते हैं। परिवार में कम उम्र में हार्ट डिजीज का इतिहास और कुछ दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

युवाओं में लाइफस्टाइल भी बड़ा फैक्टर

कम उम्र में देर तक बैठना, नियमित व्यायाम न करना, असंतुलित खान-पान, नींद की कमी और तंबाकू का सेवन लंबे समय में हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। AHA ने भी किशोरावस्था से ही वजन, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम कारकों पर ध्यान देने की जरूरत बताई है।

हार्ट अटैक के लक्षण पहचानना जरूरी

सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर, कमजोरी और जबड़े, गर्दन, पीठ या हाथ में दर्द हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं। महिलाओं में असामान्य थकान, मतली या उल्टी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।

लक्षण दिखें तो तुरंत मदद लें

हार्ट अटैक में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत स्थानीय आपातकालीन चिकित्सा सेवा से संपर्क करें और मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाएं। इलाज में देरी होने पर हृदय की मांसपेशियों को अधिक नुकसान हो सकता है।

बचाव के लिए क्या करें?

धूम्रपान से बचें, नियमित शारीरिक गतिविधि रखें, वजन और ब्लड प्रेशर पर नजर रखें तथा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराते रहें। परिवार में कम उम्र में हार्ट डिजीज का इतिहास हो तो नियमित चिकित्सकीय सलाह लेना खास तौर पर उपयोगी है।

कम उम्र का मतलब जोखिम से पूरी तरह सुरक्षित होना नहीं

कम उम्र अपने आप में हार्ट अटैक से सुरक्षा की गारंटी नहीं है। 2025 की AHA वैज्ञानिक सलाह और 2026 के शोध दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि हृदय रोग के जोखिम कारकों की पहचान और रोकथाम जितनी जल्दी शुरू हो, उतना बेहतर है।

नोट: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या हार्ट अटैक जैसे लक्षण होने पर घरेलू उपायों में समय न गंवाएं और तुरंत चिकित्सा सहायता लें।