नई दिल्ली, 12 सितंबर। जेन Z यानी युवा पीढ़ी अपने माता-पिता से जुड़ाव और अपनी आजादी, दोनों को महत्व देती है। वह परिवार का साथ और सलाह चाहती है, लेकिन करियर, दोस्ती, पैसे और निजी जिंदगी से जुड़े फैसलों में अपनी पसंद की जगह भी चाहती है। यही बदलाव माता-पिता और बच्चों के रिश्ते की नई तस्वीर सामने ला रहा है।
परिवार आज भी पहचान का अहम हिस्सा
Deloitte की 2025 Gen Z and Millennial Survey के मुताबिक, भारत में 56 फीसदी Gen Z ने दोस्तों और परिवार को अपनी पहचान के लिए सबसे अहम बताया। यानी परिवार की अहमियत कम नहीं हुई है, बल्कि रिश्तों को देखने का तरीका बदला है। युवा चाहते हैं कि घर में उनकी बात सुनी जाए और उनकी व्यक्तिगत पहचान का भी सम्मान हो।
प्यार और सलाह चाहिए, लेकिन हर फैसले में दखल नहीं
Gen Z के लिए Personal Space का मतलब परिवार से दूरी बनाना नहीं है। करियर, नौकरी, दोस्ती या रिलेशनशिप जैसे मामलों में माता-पिता की सलाह जरूरी हो सकती है, लेकिन आखिरी फैसला खुद लेने की इच्छा भी मजबूत है। यही अंतर कई बार पीढ़ियों के बीच गलतफहमी पैदा करता है।
Personal Space क्यों बन गया इतना जरूरी?
Gallup और Walton Family Foundation की 2024 की रिसर्च में 16 फीसदी युवाओं ने कहा कि वे चाहते हैं कि माता-पिता उनकी आजादी और Personal Space की जरूरत को बेहतर समझें। यह रिसर्च भारतीय Gen Z पर आधारित नहीं है, लेकिन इससे युवाओं की भावनात्मक जरूरतों में स्वतंत्रता की भूमिका समझी जा सकती है।
करियर और पैसों में भी अपनी पसंद
Gen Z नौकरी को केवल कमाई का जरिया नहीं मानती। Deloitte की भारतीय रिपोर्ट में 86 फीसदी Gen Z ने नौकरी में उद्देश्य को अपनी संतुष्टि और भलाई के लिए जरूरी बताया। वहीं Deloitte की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, 54 फीसदी भारतीय Gen Z ने आर्थिक कारणों से बड़े जीवन फैसले टालने की बात कही।
रिश्तों का नया फॉर्मूला
Gen Z की अपेक्षा साफ है—फैमिली का साथ रहे, लेकिन उसकी अपनी पहचान भी बनी रहे। उसे सलाह चाहिए, नियंत्रण नहीं; अपनापन चाहिए, लेकिन अपनी सीमाओं के साथ। माता-पिता और बच्चों के बीच बेहतर संवाद इस बदलती सोच को समझने की सबसे बड़ी कुंजी हो सकता है।




