रांची, 29 अगस्त 2026 : देश के कई राज्यों में इंफ्लुएंजा ए H1N1 (स्वाइन फ्लू) और H3N2 के मामले बढ़ने के बाद झारखंड स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। राज्य में फिलहाल बड़े पैमाने पर संक्रमण के मामले सामने नहीं आए हैं, मगर संभावित मरीजों की जल्द पहचान और इलाज के लिए जिलों में निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी सिविल सर्जन और जिला सर्विलेंस अधिकारियों को स्क्रीनिंग, जांच, उपचार व निगरानी व्यवस्था मजबूत करने को कहा है। इसके साथ ही अस्पतालों में जरूरी दवाओं, बेड, ऑक्सीजन और जांच की अन्य सुविधा उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
ओपीडी में संदिग्ध मरीजों की होगी स्क्रीनिंग
जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी में ILI (Influenza Like Illness) और SARI (Severe Acute Respiratory Infection) के मरीजों की स्क्रीनिंग की जाएगी। सर्दी, खांसी, बुखार, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना, उल्टी, डायरिया और अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षण वाले मरीजों पर विशेष नजर रखी जाएगी। सांस लेने में परेशानी के कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों की भी विशेष निगरानी होगी।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को मास्क पहनने का निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों को मास्क पहनने का निर्देश दिया है। संभावित संक्रमित मरीजों की जांच और इलाज के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरतने को कहा गया है। अस्पतालों को संक्रमण की स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है।
रिम्स और एमजीएम में जांच की सुविधा
झारखंड में इंफ्लुएंजा ए H1N1 और H3N2 की प्रयोगशाला जांच की सुविधा रांची स्थित रिम्स और जमशेदपुर के एमजीएम में उपलब्ध है। जिलों को संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के बीच बेहतर समन्वय बनाने को कहा गया है।
अस्पतालों में आइसोलेशन बेड तैयार रखने का निर्देश
मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में संक्रमित या संदिग्ध मरीजों के लिए कम से कम एक आइसोलेशन बेड चिन्हित रखने को कहा गया है। इसके अलावा अस्पतालों में PPE किट, N-95 मास्क, ट्रिपल लेयर मास्क, VTM किट, जरूरी दवाएं, ऑक्सीजन उपकरण और वेंटिलेटर जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रखने का निर्देश दिया गया है।
रोजाना रिपोर्टिंग पर भी नजर
जिला सर्विलेंस इकाइयों को ILI और SARI मामलों के ट्रेंड पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। इंफ्लुएंजा से जुड़ी जांच और मरीजों की जानकारी नियमित रूप से स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली पर दर्ज करनी होगी। स्वास्थ्य विभाग का जोर इस बात पर है कि संभावित मामलों की पहचान शुरुआती स्तर पर हो और जरूरत पड़ने पर मरीज को समय पर उपचार मिल सके।
लोगों को भी सावधानी बरतने की सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकने, नियमित रूप से हाथ धोने और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बुखार, खांसी या गले में खराश जैसे लक्षण होने पर सार्वजनिक स्थानों से दूरी बनाए रखने और डॉक्टर की सलाह लेने को कहा गया है। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएं लेने से बचने की भी अपील की गई है।
बुजुर्गों और बच्चों का रखें विशेष ध्यान
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बुजुर्गों, पांच साल तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में इंफ्लुएंजा संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे लोगों में लक्षण दिखाई देने पर विशेष सावधानी बरतने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की गई है।
स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए क्या करें ?
- खांसते और छींकते समय नाक-मुंह को ढकें।
- साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोएं।
- आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचें।
- बुखार, खांसी या गले में खराश होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी रखें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लेते रहें।
- लक्षण गंभीर होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें।
झारखंड में फिलहाल निगरानी पर जोर
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि राज्य में फिलहाल बड़े स्तर पर इंफ्लुएंजा संक्रमण की स्थिति नहीं है। हालांकि, दूसरे राज्यों में बढ़ते मामलों को देखते हुए सर्विलेंस और अस्पतालों की तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है, ताकि संक्रमण के संभावित प्रसार को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।




