रांची, 30 अगस्त। प्रस्तावित परिसीमन के विरोध में रविवार को राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में आदिवासी एकता महाजुटान का आयोजन किया गया। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम में झारखंड के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पहुंचे। आयोजकों की ओर से करीब एक लाख लोगों के जुटने का दावा किया गया। महाजुटान में महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की भी भागीदारी देखने को मिली।

परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज की चिंता

महाजुटान में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई। मंच से नेताओं ने कहा कि निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन में केवल जनसंख्या को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना जरूरी है।

कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, के. राजू, रामेश्वर उरांव, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, सुबोध कांत सहाय, सुखदेव भगत समेत कई नेता मौजूद रहे।

चंदा जुटाकर पहुंचे ग्रामीण

महाजुटान में शामिल कई लोगों ने बताया कि वे गांवों से चंदा जुटाकर रांची पहुंचे हैं। कुछ लोगों ने एक दिन की मजदूरी छोड़कर कार्यक्रम में भाग लिया। महिलाओं का कहना था कि परिसीमन उनके समाज के राजनीतिक अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।

क्या है परिसीमन और क्यों है विवाद?

परिसीमन का अर्थ लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण है। झारखंड में मौजूदा व्यवस्था के तहत विधानसभा की 28 सीटें और लोकसभा की 5 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। आदिवासी संगठनों को आशंका है कि भविष्य में सीटों के पुनर्गठन का असर इन क्षेत्रों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है।

अब नहीं तो कभी नहीं’ का संदेश

महाजुटान में ‘अब नहीं तो कभी नहीं’ जैसे नारे लगाए गए। नेताओं ने संवैधानिक संरक्षण और आदिवासी प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए परिसीमन प्रक्रिया पर स्पष्टता की मांग की। हालांकि, झारखंड में एसटी सीटों के घटने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। महाजुटान के जरिए आयोजकों ने केंद्र सरकार तक अपनी चिंताओं और मांगों को पहुंचाने का प्रयास किया।