रांची | 25 जुलाई 2026

झारखंड हाईकोर्ट में भुइहर समुदाय की ओर से एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में अनुसंधान रिपोर्ट और सरकारी दस्तावेजों में समुदाय के नाम से जुड़ी कथित लिपिकीय त्रुटि को सुधारने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते यह गलती नहीं सुधारी गई, तो भविष्य में हजारों लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण-पत्र प्राप्त करने और उससे जुड़े संवैधानिक अधिकारों का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

नई जनजाति नहीं, केवल नाम सुधारने की मांग

'भुइहर ट्राइब राइट्स होल्डर्स कमेटी' की ओर से अधिवक्ता अच्युत स्वरूप मिश्र के माध्यम से दायर याचिका में स्पष्ट किया गया है कि उनका उद्देश्य किसी नई जनजाति को ST सूची में शामिल कराने का निर्देश लेना नहीं है। समिति केवल यह चाहती है कि अनुसंधान रिपोर्ट और उससे जुड़े सभी सरकारी दस्तावेजों में समुदाय का नाम आधिकारिक भूमि अभिलेखों के अनुरूप दर्ज किया जाए।

2020 से चल रही अनुसंधान प्रक्रिया

याचिका के अनुसार वर्ष 2020 में झारखंड सरकार ने भुइहर समुदाय की सामाजिक, सांस्कृतिक और नृवंशीय स्थिति का अध्ययन कराने की जिम्मेदारी डॉ. रामदयाल मुंडा ट्राइबल वेलफेयर रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI) को सौंपी थी। विस्तृत अध्ययन के बाद संस्थान ने समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किए जाने की अनुशंसा की थी। इसके बाद 2021 में राज्य सरकार ने अपनी अनुशंसा केंद्र सरकार को भेजी। वर्ष 2023 में रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) ने अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगा, जिसके बाद TRI ने दोबारा अध्ययन कर दिसंबर 2024 में अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी।

रिपोर्ट और खतियान के नाम में अंतर बना विवाद की वजह

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अंतिम अनुसंधान रिपोर्ट में समुदाय का नाम "भूईंहर मुंडा/भुईंहर" लिखा गया है, जबकि छोटानागपुर काश्तकारी (CNT) अधिनियम, 1908 के तहत तैयार मूल खतियानों और राजस्व अभिलेखों में केवल "भुइहर" दर्ज है। उनका कहना है कि यह देखने में मामूली त्रुटि है, लेकिन भविष्य में सरकारी अधिसूचना और भूमि अभिलेखों के बीच नाम अलग होने से कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है।

हजारों लोगों के अधिकार प्रभावित होने की आशंका

याचिका में कहा गया है कि यदि केंद्र सरकार इसी नाम के आधार पर अधिसूचना जारी करती है, तो समुदाय के लोगों को ST प्रमाण-पत्र, आरक्षण, सरकारी योजनाओं और अन्य संवैधानिक लाभ लेने में प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। याचिकाकर्ताओं ने इसे अनुच्छेद 14, 15(4), 16(4), 21 और 46 के तहत प्राप्त अधिकारों का संभावित उल्लंघन बताया है।

हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें

याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि राज्य सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह TRI की अंतिम रिपोर्ट, उसके शीर्षक और संबंधित सभी सरकारी पत्राचार में आवश्यक संशोधन कर समुदाय का नाम आधिकारिक अभिलेखों के अनुरूप "भुइहर" दर्ज करे तथा संशोधित अनुशंसा केंद्र सरकार और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को भेजे। फिलहाल मामला झारखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन है और अब सभी की नजर अदालत के आगामी फैसले पर टिकी हुई है।