रांची, 14 सितंबर 2026 : झारखंड में विधायकों और सरकारी अधिकारियों के बीच जवाबदेही को लेकर नया नियम बनाने की मांग उठी है। राज्य के वित्त, योजना एवं विकास, वाणिज्य-कर और संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर विधायकों के विशेषाधिकार का दायरा बढ़ाने का सुझाव दिया है। इस बीच मंत्री ने मांग की है कि यदि कोई अधिकारी विधायक के पत्र की अनदेखी करता है, जनहित से जुड़े मामले को जानबूझकर टालता है या जनप्रतिनिधि के साथ अशिष्ट व्यवहार करता है, तो इसे विशेषाधिकार हनन के दायरे में लाया जाए।

विधायकों के पत्रों का जवाब नहीं मिलने की शिकायत

राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, विधायकों की लगातार शिकायत रहती है कि उनके पत्रों का समय पर जवाब नहीं दिया जाता। कई बार अधिकारियों द्वारा फोन नहीं उठाने और जनहित से जुड़े सुझावों को गंभीरता से नहीं लेने की शिकायत भी सामने आती है। प्रदेश के वित्त मंत्री का कहना है कि विधायक जनता और सरकार के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। ऐसे में जनता की समस्याओं से जुड़े उनके पत्रों और सुझावों पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होना बहुत जरूरी है।

विधानसभा की नियमावली में संशोधन का सुझाव

राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा की कार्य संचालन नियमावली में आवश्यक संशोधन का सुझाव दिया है। इसके तहत किसी अधिकारी द्वारा विधायक के साथ अपमानजनक या अशिष्ट व्यवहार करने अथवा जानबूझकर जनहित से जुड़े मामलों को लंबित रखने को विशेषाधिकार हनन की श्रेणी में शामिल करने की बात कही गई है। हालांकि, मंत्री ने प्रस्तावित व्यवस्था को एकतरफा नहीं रखने की बात भी कही है। उनका सुझाव है कि यदि कोई जनप्रतिनिधि किसी अधिकारी के साथ अभद्रता या दुर्व्यवहार करता है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए।

जनप्रतिनिधि और अफसर दोनों की जवाबदेही

मंत्री के प्रस्ताव का उद्देश्य सिर्फ अधिकारियों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सम्मान, जवाबदेही और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना बताया गया है। अगर इस तरह का प्रावधान नियमावली में शामिल किया जाता है, तो विधायकों के पत्रों और जनहित से जुड़े मामलों पर प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही बढ़ सकती है।

क्या है विधायकों का विशेषाधिकार ?

विधानसभा के सदस्यों को सदन में स्वतंत्र रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए कुछ विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं। इन्हें विधायकों के विशेषाधिकार कहा जाता है। सदन की कार्यवाही में अनुचित हस्तक्षेप या सदन अथवा उसके सदस्यों की गरिमा को प्रभावित करने वाला आचरण विशेषाधिकार का मामला बन सकता है। ऐसे मामलों में विधानसभा की विशेषाधिकार समिति या सदन नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। अब राधाकृष्ण किशोर के इस सुझाव के बाद नजर विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर होने वाली अगली कार्रवाई पर है।