महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा में 33 अभ्यर्थियों को झटका, एकल पीठ के आदेश पर खंडपीठ की रोक

रांची, 2 सितंबर। झारखंड हाईकोर्ट ने महिला पर्यवेक्षिका प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़े मामले में अहम आदेश दिया है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें 33 अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द करने के JSSC के फैसले को निरस्त कर उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया गया था। मामले में अदालत ने 33 अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

33 अभ्यर्थियों को जारी हुआ नोटिस

चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने JSSC का पक्ष सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। अदालत ने प्रतिवादी आकांक्षा कुमारी समेत 33 अभ्यर्थियों को नोटिस जारी करते हुए अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

JSSC ने एकल पीठ के आदेश को दी चुनौती

JSSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल, अधिवक्ता प्रिंस कुमार और अधिवक्ता जयप्रकाश ने अदालत के समक्ष आयोग का पक्ष रखा। आयोग की ओर से दलील दी गई कि एकल पीठ ने 15 मई 2026 को जो आदेश पारित किया था, उसमें तथ्यों और नियमों का सही तरीके से आकलन नहीं किया गया।

आयोग ने अदालत को बताया कि वर्ष 2019, 2021 और 2023 की संशोधित नियमावली का गजट नोटिफिकेशन वर्ष 2026 में हुआ था। इसी आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया था।

स्नातक डिग्री की योग्यता को लेकर हुआ विवाद

JSSC के अनुसार, संबंधित 33 अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी इसलिए रद्द की गई थी क्योंकि उनकी स्नातक की डिग्री नियुक्ति विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप नहीं थी। इसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।

एकल पीठ ने दिया था नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश

रिट याचिकाओं पर सुनवाई के बाद एकल पीठ ने JSSC द्वारा उम्मीदवारी रद्द करने के फैसले को निरस्त कर दिया था। साथ ही अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया गया था। JSSC ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए खंडपीठ में अपील दाखिल की।

अब खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए 33 अभ्यर्थियों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी, जिसके बाद आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।