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कमल भूषण हत्याकांड के सरकारी गवाह पर हमला | Diarch News
रांची के कांटाटोली चौक के पास कमल भूषण हत्याकांड के सरकारी गवाह मुनव्वर अफाक पर हमले की कोशिश का मामला सामने आया है। उनके मुताबिक बाइक सवार तीन लोगों ने पिस्टल तानी, लेकिन हथियार मिसफायर हो गया। पुलिस ने नाकेबंदी और CCTV जांच शुरू कर दी है।
Sapna Kashyap
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रांची, 20 सितंबर। चर्चित जमीन कारोबारी कमल भूषण हत्याकांड के सरकारी गवाह मुनव्वर अफाक पर रविवार सुबह कांटाटोली चौक के पास कथित तौर पर जानलेवा हमला करने की कोशिश की गई। पुलिस के अनुसार, बाइक सवार तीन लोगों ने उन्हें निशाना बनाने का प्रयास किया, लेकिन पिस्टल मिसफायर होने से उनकी जान बच गई। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में जांच और सर्च अभियान तेज कर दिया है।
बाइक से पहुंचे तीन हमलावर
मुनव्वर अफाक के अनुसार, कांटाटोली चौक के समीप बाइक सवार तीन लोग उनके पास पहुंचे और पिस्टल तान दी। बताया गया कि एक व्यक्ति ने हेलमेट पहन रखा था, जबकि दूसरे ने चेहरे को गमछे से ढका हुआ था। इसी दौरान हथियार से फायर करने का प्रयास किया गया, लेकिन गोली नहीं चली। इसके बाद तीनों बाइक से नामकुम की दिशा में फरार हो गए।
दो संदिग्धों के नाम मुनव्वर ने बताए
घटना के बाद मुनव्वर अफाक ने पुलिस को बताया कि हमलावरों में एलेक्स और विशाल उर्फ कटला शामिल हो सकते हैं। तीसरे व्यक्ति की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हमलावरों के प्रतिबंधित संगठन पीएलएफआई से संबंध हो सकते हैं। इन दावों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी।
जेल में बंद आरोपियों पर साजिश का आरोप
मुनव्वर अफाक ने इस हमले के पीछे कमल भूषण हत्याकांड में दोषी ठहराए गए डब्ल्यू कुजूर और राहुल कुजूर के इशारे की आशंका भी जताई है। उन्होंने दावा किया कि सरकारी गवाह बनने के बाद उन्हें पहले भी धमकियां मिली थीं। हालांकि, इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पुलिस ने शुरू की नाकेबंदी और जांच
सूचना मिलते ही लोअर बाजार थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने हमलावरों के भागने की संभावित दिशा में नाकेबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया है। आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस का कहना है कि पीड़ित के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
कमल भूषण हत्याकांड में पहले आ चुका है फैसला
कमल भूषण की हत्या 30 मई 2022 को हुई थी। सितंबर 2025 में अदालत ने मामले में डब्ल्यू कुजूर, राहुल कुजूर और काविस अदनान को दोषी ठहराया था, जबकि मुनव्वर अफाक को साक्ष्य के अभाव में बरी किया गया था और वह सरकारी गवाह बने थे।