चतरा, 15 सितंबर। झारखंड के चतरा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ हजारीबाग एसीबी ने बड़ी कार्रवाई की है। सदर अंचल के हल्का नंबर-7 में तैनात राजस्व कर्मचारी सतीश प्रसाद को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि जमीन के म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज के लिए उससे 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। कार्रवाई के बाद प्रखंड-अंचल कार्यालय परिसर में हड़कंप मच गया।
जमीन के म्यूटेशन के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप
मामले की शिकायत गिद्धौर थाना क्षेत्र के नया खाप निवासी तुलसी यादव ने हजारीबाग एसीबी से की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दारियातू और लेम पंचायत से जुड़े हल्का नंबर-7 में तैनात राजस्व कर्मचारी सतीश प्रसाद ने जमीन के म्यूटेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए 30 हजार रुपये की मांग की।
सत्यापन में आरोप सही मिलने का दावा
शिकायत मिलने के बाद एसीबी टीम ने मामले का गोपनीय तरीके से सत्यापन कराया। अधिकारियों के अनुसार, सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की शिकायत सही पाई गई। इसके बाद आरोपी को पकड़ने के लिए एसीबी ने जाल बिछाया और रिश्वत की पहली किस्त लेते ही कार्रवाई की योजना बनाई।
15 हजार रुपये लेते ही एसीबी ने दबोचा
मंगलवार दोपहर करीब 12:45 बजे शिकायतकर्ता तुलसी यादव सदर प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित कर्मचारी भवन पहुंचे। उनके पास रिश्वत की पहली किस्त के 15 हजार रुपये थे। जैसे ही राजस्व कर्मचारी ने कथित तौर पर रकम अपने हाथ में ली, सादे कपड़ों में पहले से मौजूद एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।
कार्यालय में दस्तावेजों की भी जांच
गिरफ्तारी के बाद एसीबी टीम ने आरोपी कर्मचारी के कार्यालय में रखे दस्तावेजों और संबंधित अभिलेखों की भी जांच की। टीम ने मामले से जुड़े जरूरी कागजात जुटाए और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की।
आरोपी को हजारीबाग ले गई एसीबी टीम
आवश्यक कार्रवाई के बाद एसीबी की टीम आरोपी सतीश प्रसाद को अपने साथ हजारीबाग ले गई। अधिकारियों के अनुसार, आगे की प्रक्रिया के बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जाएगा। हजारीबाग एसीबी के एसपी आरिफ इकराम ने कार्रवाई की पुष्टि की है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई से मचा हड़कंप
एसीबी की अचानक हुई कार्रवाई से सदर प्रखंड और अंचल कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ हुई इस कार्रवाई की चर्चा है। हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।




