नई दिल्ली, 13 अगस्त 2026 : नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार समारोह में झारखंड की कला और संस्कृति का गौरव बढ़ा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य के तीन कलाकारों को प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। सम्मान पाने वालों में सरायकेला के प्रसिद्ध छऊ मुखौटा शिल्पकार एवं गुरु सुशांत कुमार महापात्र तथा रांची के बुंडू की पारंपरिक नचनी नृत्यांगना बहनें बुटन देवी और सोमवारी देवी शामिल हैं।

छऊ मुखौटा शिल्प के लिए सुशांत कुमार महापात्र सम्मानित

सरायकेला के सुशांत कुमार महापात्र को छऊ और पारंपरिक मुखौटा शिल्प के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति ने उन्हें मेडल पहनाने के साथ प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया।पुरस्कार मिलने के बाद सुशांत कुमार महापात्र ने यह सम्मान अपने गुरुओं को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि सरायकेला की छऊ मुखौटा कला को आगे बढ़ाना उनके जीवन का उद्देश्य है। उन्होंने छऊ मुखौटा शिल्प और छऊ नृत्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आगे भी काम जारी रखने की बात कही।

नचनी नृत्य की परंपरा को बचाने वाली बहनों को सम्मान

बुंडू, रांची की सगी बहनों बुटन देवी और सोमवारी देवी को पारंपरिक नचनी नृत्य परंपरा को जीवित रखने और आगे बढ़ाने के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। दोनों बहनों का सम्मान झारखंड की लोक कला और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

115 कलाकारों को मिला सम्मान

वर्ष 2024 और 2025 के लिए आयोजित विशेष अलंकरण समारोह में देशभर के कुल 115 कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। समारोह में कई केंद्रीय मंत्री, संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा, सचिव राजू दास समेत कई लोग मौजूद रहे। झारखंड के तीन कलाकारों को मिले इस सम्मान से राज्य की छऊ, मुखौटा शिल्प और पारंपरिक नृत्य संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है।