नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026 : वरिष्ठ नागरिकों की सुविधाओं और वृद्धाश्रमों की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। सोमवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों से बुजुर्गों के लिए उपलब्ध वृद्धाश्रम, बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की ताजा स्थिति रिपोर्ट भी मांगी। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह निर्देश डॉ. अश्विनी कुमार की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। यह याचिका वर्ष 2016 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

हर जिले में वृद्धाश्रम और पर्याप्त पेंशन की मांग

जनहित याचिका में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने प्रत्येक जिले में वृद्धाश्रम स्थापित करने, बुजुर्गों को पर्याप्त पेंशन देने और उनकी देखभाल से जुड़े कानूनी प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग भी की है।

केंद्र ने हाईकोर्ट में मामला भेजने का दिया सुझाव

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से सुझाव दिया गया कि मामले को संबंधित उच्च न्यायालयों में स्थानांतरित कर दिया जाए। इस पर पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट व्यापक दिशा-निर्देश तय कर सकता है, जबकि उनके जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी उच्च न्यायालयों के माध्यम से की जा सकती है। हालांकि इससे पहले शीर्ष अदालत ने राज्यों से मौजूदा व्यवस्था और वरिष्ठ नागरिकों को मिल रही सुविधाओं की जानकारी जुटाने का फैसला किया।

राज्यों को 4 सप्ताह में दाखिल करनी होगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को उनके महाधिवक्ताओं को पत्र प्राप्त होने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट में वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध बुनियादी ढांचे, वृद्धाश्रमों और अन्य सुविधाओं की मौजूदा स्थिति की जानकारी देनी होगी।

2016 से लंबित है जनहित याचिका

यह जनहित याचिका वर्ष 2016 में दायर की गई थी। इसमें बुजुर्गों के कानूनी और संवैधानिक अधिकारों, उनके संरक्षण तथा कल्याण से जुड़े प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन का मुद्दा उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट की ताजा पहल से अब राज्यों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।