नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026 : बांग्लादेश की जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। इस वीडियो में उन्हें अपनी मां के निधन के बाद भावुक अवस्था में देखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उन्हें पांच घंटे की पैरोल मिली थी। इसी वीडियो को लेकर बीजेपी के पूर्व प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर बड़ा सवाल उठाए हैं।
चिन्मय कृष्ण दास के वीडियो पर शहजाद पूनावाला का सवाल
शहजाद पूनावाला ने चिन्मय कृष्ण दास के वीडियो को शेयर करते हुए मानवाधिकार संगठनों और विभिन्न मुद्दों पर सक्रिय लॉबी की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि पीड़ित हिंदुओं के मामले में आवाज उठाने और विरोध दर्ज कराने की चिंता आखिर क्यों नहीं दिखाई देती। अपने पोस्ट में उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि क्या हिंदुओं की जान की कोई अहमियत नहीं है? उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई।
मां के अंतिम संस्कार के लिए मिली थी पांच घंटे की पैरोल
रिपोर्ट के अनुसार, चिन्मय कृष्ण दास नवंबर 2024 से जेल में बंद हैं और उन पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है। हाल ही में उनकी मां का निधन हुआ था। इसके बाद उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कथित तौर पर सिर्फ पांच घंटे की पैरोल दी गई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में चिन्मय कृष्ण दास भावुक नजर आए। इसी वीडियो को लेकर शहजाद पूनावाला ने बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति और उनके अधिकारों को लेकर सवाल उठाए हैं।
तहसीन पूनावाला भी समर्थन में उतरे
शहजाद पूनावाला के भाई और सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने भी चिन्मय कृष्ण दास के मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि अपनी मां को अलविदा कहने के लिए केवल पांच घंटे मिलना बेहद पीड़ादायक और अकल्पनीय है। तहसीन ने इस घटना को मानवीय और मानवाधिकार के नजरिए से भी गंभीर बताते हुए कहा कि चिन्मय कृष्ण दास को इस स्थिति में देखकर उन्हें गहरा दुख हुआ। उन्होंने भारत की वैश्विक भूमिका का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या भारत को ऐसे मामलों में बुनियादी मानवाधिकारों के लिए आवाज नहीं उठानी चाहिए।
भारत से अंतरराष्ट्रीय दबाव की उम्मीद
तहसीन पूनावाला ने यह भी कहा कि भारत अपनी वैश्विक ताकत और प्रभाव के कारण ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी हिंदू पुजारी के बुनियादी मानवाधिकारों को लेकर आवाज उठानी हो, तो हिंदू समुदाय भारत के अलावा किससे उम्मीद कर सकता है। चिन्मय कृष्ण दास के मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि इस पूरे मामले पर बांग्लादेश की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया और घटनाक्रम की अलग-अलग रिपोर्टों को भी ध्यान में रखना बहुत जरूरी है।




