नई दिल्ली, 28 सितंबर 2026 : ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI Person-to-Merchant (P2M) transactions पर प्रस्तावित Merchant Discount Rate (MDR) का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार, RBI और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। हालांकि अदालत ने फिलहाल नई MDR व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से कहा गया कि यह टैक्स या सरकार की ओर से वसूली जाने वाली फीस नहीं, बल्कि payment ecosystem के participants के बीच settlement से जुड़ा एक charge है। इस पर पीठ ने इस व्यवस्था का कानूनी और तकनीकी आधार स्पष्ट करने के लिए हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

क्या है ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट का मामला ?

केंद्र सरकार ने सितंबर 2026 में UPI के लिए नया framework जारी किया। इसके तहत ₹2,000 से अधिक के कुछ P2M transactions पर 0.4% MDR लागू किया जाना है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ₹2,000 से ज्यादा UPI भेजने वाले हर व्यक्ति से 0.4% पैसा काटा जाएगा।

सरकारी framework के अनुसार :

  • P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान पूरी तरह free रहेगा, राशि कितनी भी हो।
  • ₹2,000 तक के सामान्य merchant payments पर zero MDR जारी रहेगा।
  • ₹2,000 से ज्यादा के निर्धारित P2M transactions पर 0.4% MDR लागू होगा।
  • ₹75,000 या उससे अधिक के transaction पर MDR अधिकतम ₹300 प्रति transaction तक सीमित रहेगा।
  • कुछ essential sectors में ₹2,000 से ऊपर के transaction पर flat ₹5 MDR का प्रावधान है।
  • सरकार के अनुसार करीब 96% P2M transactions इस नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ ?

सोमवार यानी 28 सितंबर को मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने हुई।इस याचिका में सितंबर में जारी केंद्र के notifications को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से UPI के जरिए digital payments और cash economy पर इसके प्रभाव से संबंधित दलीलें रखी गईं। केंद्र की ओर से Additional Solicitor General वेंकटरमन ने सरकार का पक्ष रखा। सरकार की ओर से कहा गया कि नई व्यवस्था अभी लागू होने की प्रक्रिया में है और 15 अक्टूबर 2026 अहम तारीख है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि MDR सरकार द्वारा सीधे वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है।

'यह टैक्स या फीस नहीं तो फिर क्या है ?'

सुनवाई का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसी सवाल से जुड़ा रहा। सरकार की दलील थी कि UPI payment infrastructure को चलाने में अलग-अलग payment participants की लागत आती है। सरकार ने इसे payment ecosystem के भीतर settlement-related fee/charge के तौर पर समझाया।सरकार के मुताबिक इस रकम का वितरण banks, payment service providers और UPI application providers जैसे participants के बीच किया जाएगा और सरकार स्वयं इसमें से पैसा नहीं लेगी। पीठ ने इस व्यवस्था की प्रकृति और executive authority को स्पष्ट करने के लिए केंद्र से विस्तृत जवाब मांगा। अदालत ने केंद्र और RBI समेत संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर counter-affidavit दाखिल करने को कहा।

क्या UPI इस्तेमाल करने वाले आम लोगों से पैसा कटेगा ?

मौजूदा सरकारी framework के अनुसार नहीं। सबसे महत्वपूर्ण अंतर P2P और P2M का है।

P2P — व्यक्ति से व्यक्ति

अगर कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को UPI से पैसा भेजता है, तो amount चाहे ₹2,000 हो, ₹20,000 हो या उससे ज्यादा, उस transaction पर MDR नहीं लगाया जाना है। सरकार ने इसे पूरी तरह free रखने की बात कही है।

P2M — व्यक्ति से व्यापारी

जब कोई ग्राहक किसी merchant को UPI से payment करता है, तब transaction P2M कहलाता है। नए framework में ₹2,000 से ऊपर के specified merchant transactions पर MDR लागू किया जाना है। हालांकि सरकार ने यह भी कहा है कि merchant को यह MDR ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं होगी और UPI apps को इसके नाम पर अलग platform fee या hidden charge लगाने से रोका गया है।

0.4% MDR का मतलब कितना पैसा ?

उदाहरण के तौर पर अगर कोई qualifying merchant transaction ₹10,000 का है, तो 0.4% MDR की गणना ₹40 होगी। लेकिन यह राशि ग्राहक के UPI payment से अलग से काटी जाने वाली फीस के रूप में निर्धारित नहीं है। यह merchant-side payment ecosystem charge है। और ₹75,000 या उससे अधिक के qualifying transaction में 0.4% की गणना होने पर भी MDR ₹300 से अधिक नहीं हो सकता।

Essential sectors में अलग नियम

मालूम हो कि कुछ महत्वपूर्ण और relatively low-margin sectors के लिए केंद्र सरकार ने एक अलग व्यवस्था रखी है। इनमें—

  • रेलवे
  • टेलीकॉम
  • इंश्योरेंस
  • फ्यूल
  • कृषि इनपुट

जैसे sectors शामिल हैं। ₹2,000 से ऊपर के qualifying transactions पर इन sectors में ₹5 का flat MDR लागू करने का प्रावधान है।

सरकार MDR क्यों ला रही है ?

सरकार का कहना है कि UPI ecosystem को लंबे समय तक financially sustainable रखने के लिए payment infrastructure की लागत को address करना जरूरी है। 15 सितंबर के वित्त मंत्रालय के स्पष्टीकरण के मुताबिक नया framework UPI के विस्तार, technological advancement और resilience को बनाए रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। साथ ही छोटे merchants और individual users को अतिरिक्त payment burden से बचाने के लिए कई transactions को zero-MDR category में रखा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अभी क्या फैसला दिया है ?

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने अभी MDR व्यवस्था को सही या गलत घोषित नहीं किया है। अदालत ने फिलहाल अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है और केंद्र, RBI तथा अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। इसलिए मामले की कानूनी स्थिति पर अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं आया है। अगले चरण में केंद्र और अन्य पक्ष अपने counter-affidavits दाखिल करेंगे। इसके बाद अदालत इस व्यवस्था के कानूनी आधार और अन्य संबंधित सवालों पर आगे सुनवाई कर सकती है।

UPI Users को अभी क्या समझना चाहिए ?

इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर यह भ्रम पैदा हो सकता है कि “₹2,000 से ऊपर UPI करने पर अब हर व्यक्ति को 0.4% charge देना होगा।” सरकारी framework के मुताबिक यह सही नहीं है। P2P transactions free हैं। ₹2,000 तक के सामान्य merchant transactions पर zero MDR है। और ₹2,000 से ऊपर भी MDR केवल specified P2M transactions पर लागू होता है। सरकार का दावा है कि करीब 96% merchant transactions इससे बाहर रहेंगे। अब सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल इस व्यवस्था के कानूनी और तकनीकी आधार से जुड़े हैं। अदालत के निर्देश के बाद केंद्र और RBI के हलफनामों से यह तस्वीर और स्पष्ट होगी।