नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026। UPI पेमेंट को लेकर चल रही फीस की चर्चाओं के बीच केंद्र की सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। केंद्र सरकार के मुताबिक, ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर किसी तरह की डायरेक्ट या इनडायरेक्ट फीस नहीं लगा सकते हैं। RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले पेमेंट को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। दरअसल, अगस्त 2026 में संसद ने Taxation and Other Laws (Amendment) Act, 2026 पारित किया था। इसके तहत Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में बदलाव किया गया है। इस संशोधन के बाद सरकार को यह तय करने का अधिकार मिला कि किन डिजिटल पेमेंट पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इसके बाद ₹2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर संभावित चार्ज को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। वित्त मंत्रालय ने 14 सितंबर को अधिसूचना जारी कर ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर किसी तरह का चार्ज नहीं लगाने की स्थिति स्पष्ट कर दी है।

क्या ₹2,000 UPI की नई पेमेंट लिमिट है ?

नहीं। ₹2,000 UPI की नई ट्रांजैक्शन लिमिट नहीं है। UPI के जरिए इससे ज्यादा रकम भेजी जा सकती है। ₹2,000 की सीमा फिलहाल उस रकम से जुड़ी है, जिस पर फीस नहीं लगाई जा सकती।

₹2,000 से ज्यादा पेमेंट करने पर क्या अभी चार्ज लगेगा ?

फिलहाल नहीं। यदि कोई व्यक्ति ₹2,500, ₹5,000 या ₹10,000 का UPI पेमेंट करता है, तो सिर्फ रकम ₹2,000 से ज्यादा होने के कारण कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर चार्ज लगाने के लिए सरकार को आगे अलग से नियम और दरें तय करनी होंगी।

बड़े UPI पेमेंट पर चर्चा क्यों हो रही है ?

इसका मुख्य कारण बड़े कारोबारी और मर्चेंट पेमेंट हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दुकानदारों को किए गए UPI पेमेंट में करीब 4% ट्रांजैक्शन ₹2,000 से ज्यादा के थे, लेकिन कुल रकम में इनकी हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई थी। यानी संख्या के लिहाज से बड़े पेमेंट कम हैं, लेकिन इनके जरिए काफी बड़ी रकम का लेनदेन होता है।

क्या बैंक खुद से UPI पर चार्ज लगा सकते हैं ?

नहीं। केवल इसलिए कि कोई UPI पेमेंट ₹2,000 से ज्यादा का है, बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर मनमाने तरीके से फीस नहीं लगा सकते। इसके लिए सरकार की ओर से अलग नियम बनाए जाना जरूरी होगा।

क्या दोस्त या परिवार को ₹5,000-₹10,000 भेजने पर चार्ज लगेगा ?

नहीं। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले P2P (Person-to-Person) पेमेंट मुफ्त रहेंगे। सरकार की ओर से भी संकेत दिया गया है कि आम यूजर से ऐसे पेमेंट के लिए फीस नहीं ली जाएगी।

किन पेमेंट पर लग सकती है फीस ?

फीस की चर्चा मुख्य रूप से बड़े मर्चेंट पेमेंट को लेकर है। यानी जब ग्राहक किसी दुकान, कारोबारी या सर्विस प्रोवाइडर को बड़ी रकम UPI के जरिए देता है। ऐसे पेमेंट पर भविष्य में MDR (Merchant Discount Rate) लागू करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है।

MDR क्या होता है?

MDR यानी Merchant Discount Rate। आसान भाषा में यह डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा के बदले मर्चेंट यानी दुकानदार या कारोबारी से लिया जाने वाला शुल्क है। कार्ड पेमेंट में इस तरह का चार्ज पहले से मौजूद है।

अगर MDR लागू हुआ तो कितनी फीस देनी होगी ?

फिलहाल MDR की कोई दर तय नहीं हुई है। सरकार के मुताबिक, यदि इसे लागू किया जाता है तो शुल्क की दर बहुत मामूली रखी जा सकती है और यह डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले MDR की तुलना में काफी कम होगी।

क्या MDR का बोझ ग्राहकों पर पड़ेगा ?

अभी ऐसा कोई नियम लागू नहीं हुआ है। MDR मुख्य रूप से मर्चेंट यानी दुकानदार या कारोबारी से जुड़े शुल्क के रूप में चर्चा में है। ग्राहक से सीधे कोई फीस ली जाएगी या नहीं, यह भविष्य में बनाए जाने वाले नियमों से स्पष्ट होगा।

सरकार ने UPI कानून में बदलाव क्यों किया ?

सरकार का कहना है कि देश में UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। पेमेंट सिस्टम को सुरक्षित बनाए रखने, Cyber Fraud रोकने, तकनीक को अपग्रेड करने और डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए लगातार खर्च होता है। कानून में बदलाव को इसी दीर्घकालिक जरूरत से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्या UPI महंगा होने वाला है ?

केंद्र सरकार ने फिलहाल ऐसा नहीं कहा है। सरकार का साफ कहना है कि आम यूजर के लिए UPI पेमेंट को मुफ्त रखने की नीति जारी रहेगी। संभावित बदलाव मुख्य रूप से बड़े मर्चेंट पेमेंट और उनके शुल्क से जुड़े हो सकते हैं।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा ?

रोजमर्रा के छोटे UPI पेमेंट करने वाले लोगों पर फिलहाल इसका कोई सीधा असर नहीं दिखता। वहीं, बड़े कारोबारी पेमेंट करने वालों को आगे आने वाले नियमों पर नजर रखनी होगी। खास तौर पर ₹2,000 से अधिक के Merchant Payments को लेकर सरकार की अगली व्यवस्था अहम होगी।

अभी क्या याद रखें?

  • ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर फीस नहीं लग सकती।
  • P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजा गया पैसा मुफ्त रहेगा।
  • ₹2,000 से अधिक के पेमेंट पर अभी कोई नई फीस लागू नहीं हुई है।
  • बड़े मर्चेंट पेमेंट पर भविष्य में MDR लागू किया जा सकता है।
  • MDR की सीमा और दर अभी तय नहीं हुई है।

UPI कैसे काम करता है ?

UPI के जरिए पेमेंट करने के लिए यूजर को एक Virtual Payment Address (UPI ID) बनाना होता है, जिसे बैंक अकाउंट से लिंक किया जाता है। इसके बाद पैसे भेजने के लिए बैंक अकाउंट नंबर, बैंक का नाम या IFSC कोड याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती। यदि आपके पास सामने वाले व्यक्ति की UPI ID, मोबाइल नंबर या उपलब्ध UPI पेमेंट विकल्प है, तो स्मार्टफोन के जरिए आसानी से पैसे भेजे जा सकते हैं। UPI के जरिए सिर्फ पैसे भेजने और लेने का काम ही नहीं होता, बल्कि Utility Bill Payment, Online Shopping और अन्य डिजिटल खरीदारी भी की जा सकती है।

भारत में UPI का नेटवर्क कितना बड़ा है ?

जुलाई 2026 तक देश में 741 बैंक UPI नेटवर्क से जुड़े थे। सिर्फ जुलाई 2026 में करीब 2,366 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल रकम लगभग ₹29.88 लाख करोड़ रही। वित्त वर्ष 2025-26 में देश के कुल डिजिटल पेमेंट में UPI की हिस्सेदारी करीब 84% रही। इससे साफ है कि छोटे दुकानदारों से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े कारोबारी लेनदेन तक UPI देश के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का अहम हिस्सा बन चुका है।