नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026 : समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर NDA के भीतर अब अलग-अलग रुख सामने आने लगे हैं। तेलुगु देशम पार्टी (TDP), एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने UCC के समर्थन की बात कही है। वहीं, बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) ने साफ किया है कि वह राज्य में UCC लागू नहीं होने देगा। गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य है। फिलहाल NDA की 22 राज्यों में सरकार है। उत्तराखंड में जनवरी 2025 से UCC लागू है। गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में UCC लागू करने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित हो चुका है। अब इन राज्यों में राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने का इंतजार है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ ने UCC के लिए समितियां गठित की हैं।

TDP ने किया समर्थन

लोकसभा में TDP नेता लावू कृष्ण देवरायुलु ने कहा कि उनकी पार्टी UCC का समर्थन करेगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि कानून लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करना भी जरूरी है। गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद TDP के NDA में शामिल होने से पहले चंद्रबाबू नायडू UCC के मुद्दे पर मुस्लिम समुदाय के साथ खड़े होने की बात कह चुके थे।

JDU का रुख अलग, बिहार में लागू करने से इनकार

JDU नेता श्याम रजक ने कहा कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर UCC का समर्थन करती है, लेकिन बिहार में इसे लागू नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने इस रुख पर कायम है। इस मुद्दे पर JDU नेता संजय झा के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करने की बात भी सामने आई है।

शिवसेना और HAM भी समर्थन में

शिवसेना नेता श्रीकांत शिंदे ने UCC को समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता से जुड़ा बताते हुए समर्थन किया। वहीं, HAM (सेक्युलर) के अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने भी अमित शाह के बयान का स्वागत किया और UCC का समर्थन किया।

उमर अब्दुल्ला ने उठाए सवाल

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर भाजपा के पास संसद में UCC बिल पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या है तो उसे संसद में बिल पेश करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि इसे अलग-अलग राज्यों के जरिए लागू करने की कोशिश क्यों की जा रही है। उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि NDA के सभी दल UCC के मुद्दे पर एकमत नहीं हैं।

केरल की मुस्लिम संस्था ने किया विरोध

केरल की मुस्लिम संस्था समस्त केरल जेम-इयातुल उलमा ने UCC का विरोध किया है। संस्था के अध्यक्ष मोहम्मद जिफ्री के मुताबिक, UCC का असर केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं होगा, बल्कि दूसरे धर्मों के लोग भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि मुस्लिम समुदाय में विवाह, तलाक और विरासत से जुड़े नियम धार्मिक परंपराओं का हिस्सा हैं।

UCC से जुड़े अहम सवाल

क्या UCC सभी धर्मों पर लागू होगा ?

इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना है। हालांकि, संविधान के तहत अनुसूचित जनजातियों को विशेष छूट मिल सकती है।

क्या धार्मिक रीति-रिवाज खत्म हो जाएंगे?

UCC मुख्य रूप से नागरिक मामलों से जुड़ा है। धार्मिक पूजा-पद्धति और आस्था से जुड़े मामलों पर इसका सीधा असर नहीं होगा।

राज्य में UCC कैसे लागू होगा ?

किसी राज्य में कानून लागू करने के लिए विधेयक का विधानसभा से पारित होना, राज्यपाल की मंजूरी और इसके बाद अधिसूचना जारी होना जरूरी है।