नई दिल्ली/कोलकाता, 24 सितंबर। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग से पूछा कि पार्टी के नाम और मूल चुनाव चिन्ह पर दावे से जुड़े विवाद को सुलझाने में कितना समय लगेगा। आयोग ने 18 सितंबर को अंतरिम आदेश के तहत TMC के मूल नाम और ‘घास-फूल’ चिन्ह को फिलहाल फ्रीज कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने समयसीमा को लेकर पूछा सवाल

सुनवाई के दौरान पीठ ने चुनाव आयोग के वकील से आयोग से बात कर यह पता करने को कहा कि विवाद के निपटारे में कितना समय लग सकता है। अदालत ने मामले को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने से बचने की बात भी कही।

चुनाव आयोग के फैसले के बाद दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनावों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए गए हैं। यह व्यवस्था अंतिम निर्णय होने तक अंतरिम रूप से लागू है।

कपिल सिब्बल ने रखी अपनी दलील

ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि मौजूदा चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग नहीं की जा रही है। हालांकि, उन्होंने अक्टूबर में होने वाले उपचुनाव से पहले नाम और चिन्ह विवाद पर फैसला होने की जरूरत बताई।

सिब्बल ने यह भी दलील दी कि उनकी ओर से जरूरी दस्तावेज पहले ही आयोग को उपलब्ध कराए जा चुके हैं और मामले के निपटारे में देरी हो रही है।

दूसरे पक्ष ने समय देने की बात कही

विपक्षी गुट की ओर से मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़े विवाद के समाधान में समय लग सकता है। उन्होंने शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से जुड़े पुराने विवादों का भी उदाहरण दिया।

पीठ ने सुनवाई के दौरान यह संकेत दिया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और संबंधित पक्षों को अलग-अलग नाम और चिन्ह आवंटित किए जा चुके हैं। ऐसे में चुनाव आयोग के अंतिम निर्णय का इंतजार करना महत्वपूर्ण है।

विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?

चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को TMC के मूल नाम और ‘घास-फूल’ चिन्ह को फ्रीज करते हुए दोनों गुटों को अलग नाम और चिन्ह के साथ चुनाव लड़ने की अनुमति दी थी। इसके खिलाफ ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।