नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026 : Tata Sons के चेयरमैन N. Chandrasekaran कंपनी की कमान आगे भी संभालेंगे। Tata Sons के बोर्ड ने उन्हें एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर पांच साल का नया कार्यकाल देने को मंजूरी दे दी है। यह फैसला उनके पिछले महीने लिए गए उस निर्णय के बाद आया है, जिसमें उन्होंने फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा नियुक्ति की पेशकश नहीं करने की बात कही थी। एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक बोर्ड के इस फैसले के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। Tata Sons ने इस मामले पर Reuters के सवाल का तत्काल जवाब नहीं दिया था। चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है।

अगस्त में नहीं मांगा था दूसरा कार्यकाल

चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को बोर्ड को बताया था कि वह फरवरी 2027 के बाद नए कार्यकाल के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे। इससे Tata Sons में उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू होने की स्थिति बन गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, इससे पहले उनके नए 5 साल के कार्यकाल का प्रस्ताव बोर्ड स्तर पर समर्थन की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पाया था। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान Tata Trusts और Tata Sons के बीच रणनीति व गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों पर मतभेद की खबरें सामने आई थीं। अब बोर्ड की ताजा मंजूरी से चंद्रशेखरन के नेतृत्व को आगे जारी रखने का रास्ता साफ हुआ है।

2017 में बने थे Tata Sons के चेयरमैन

N. Chandrasekaran ने अपने करियर की शुरुआत 1987 में TCS में इंटर्न के तौर पर की थी। इसके बाद उन्होंने Tata Consultancy Services में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं और 2017 में Tata Sons के चेयरमैन बने। 2022 में उन्हें दूसरा 5 साल का कार्यकाल मिला था। मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में पूरा होना था।

Tata Group में एविएशन से लेकर सेमीकंडक्टर तक विस्तार

चंद्रशेखरन के नेतृत्व में Tata Group ने कई नए क्षेत्रों में विस्तार किया है। समूह ने एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे क्षेत्रों में निवेश और विस्तार किया है। हाल के वर्षों में Tata Group के लिए Air India का अधिग्रहण और भारत में सेमीकंडक्टर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी योजनाएं प्रमुख रणनीतिक कदम रहे हैं।

Tata Sons पर Listing का दबाव भी अहम मुद्दा

चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल का फैसला ऐसे समय हुआ है जब Tata Sons के सामने Stock Market Listing से जुड़ा महत्वपूर्ण नियामकीय मुद्दा भी है। Reserve Bank of India ने सितंबर 2026 में Tata Sons की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने Core Investment Company के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन खत्म करने की मांग की थी। RBI के इस फैसले के बाद Tata Sons के संभावित सार्वजनिक लिस्टिंग का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। जानकारी के मुताबिक, Tata Sons के पास मार्च 2025 तक करीब ₹1.75 लाख करोड़ की standalone assets थीं और कंपनी RBI के NBFC नियमों के दायरे में आती है।

Tata Trusts की करीब 66% हिस्सेदारी

Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66% हिस्सेदारी है। पिछले कुछ महीनों में चंद्रशेखरन और Tata Trusts के बीच रणनीति, गवर्नेंस और Tata Sons की संभावित लिस्टिंग जैसे मुद्दों पर मतभेद की रिपोर्टें सामने आई थीं। हालांकि चंद्रशेखरन को पांच साल के नए कार्यकाल की बोर्ड मंजूरी के बाद अब Tata Group के सामने नेतृत्व की निरंतरता और Tata Sons की भविष्य की रणनीति से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे।

Tata Group, Tata Sons और Tata Trusts में क्या अंतर है?

Tata Group :
Tata नाम से जुड़े अलग-अलग कारोबार और कंपनियों का व्यापक समूह, जिसमें TCS, Tata Motors, Tata Steel, Tata Power और Air India जैसी कंपनियां शामिल हैं।

Tata Sons :
यह Tata Group की प्रमुख holding company है। Tata Sons समूह की कई कंपनियों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखती है और समूह के रणनीतिक फैसलों में केंद्रीय भूमिका निभाती है।

Tata Trusts :
Tata Trusts विभिन्न परोपकारी और सामाजिक संस्थाओं का समूह है। इसके पास Tata Sons में करीब 66% हिस्सेदारी है, जिससे कंपनी के स्वामित्व और गवर्नेंस में इसकी अहम भूमिका रहती है।