रांची, 30 सितंबर 2026 : देशभर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर आपदा प्रबंधन और प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण को अनिवार्य करने की पहल सामने आई है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने झारखंड की सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति शर्मा की ओर से दिए गए सुझावों को आगे की कार्रवाई के लिए शिक्षा मंत्रालय भेज दिया है। NDMA ने 25 सितंबर 2026 को एक पत्र जारी कर इसकी जानकारी दी। हालांकि, अभी यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह प्रस्ताव और सुझाव के स्तर पर है। स्कूलों में इसे अनिवार्य करने का अंतिम फैसला शिक्षा मंत्रालय या संबंधित सक्षम प्राधिकरण की ओर से होना अभी बाकी है।

स्कूलों के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन ढांचे का सुझाव

ज्योति शर्मा ने 31 अगस्त को NDMA के अध्यक्ष को ज्ञापन भेजकर स्कूलों के लिए एक राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन ढांचा तैयार करने की मांग की थी। इसमें बाढ़, भूकंप, भूस्खलन और आग जैसी आपदाओं से निपटने के लिए स्कूलों को पहले से तैयार रखने पर जोर दिया गया है। इस ज्ञापन में नेपाल में आई भीषण बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि समय पर चेतावनी और सही निर्णय से एक स्कूल के करीब 1,600 बच्चों की जान बचाई जा सकी थी।

हर स्कूल में इमरजेंसी इवेक्यूएशन प्लान

इस प्रस्ताव में सरकारी और निजी स्कूलों के लिए स्थानीय जोखिम के आधार पर इमरजेंसी इवेक्यूएशन प्लान तैयार करने का सुझाव भी दिया गया है। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग से मिलने वाली शुरुआती चेतावनी को तुरंत स्कूल प्रशासन तक पहुंचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की बात भी कही गई है। इससे इस प्रस्ताव को लागू कराने में काफी मदद मिलेगी।

शिक्षकों और बस चालकों को CPR की ट्रेनिंग

ज्ञापन में शिक्षकों, स्कूल कर्मचारियों और बस चालकों को CPR, बेसिक लाइफ सपोर्ट, फर्स्ट-एड और AED के इस्तेमाल की व्यावहारिक ट्रेनिंग देने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा आग, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए साल में कम से कम दो बार मॉक ड्रिल कराने और उसके बाद इसकी समीक्षा करने की भी सिफारिश की गई है।

छोटे बच्चों और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अलग प्रोटोकॉल

प्रस्ताव में छोटे बच्चों और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अलग सुरक्षित निकासी प्रोटोकॉल तैयार करने की मांग की गई है। इसका उद्देश्य आपदा की स्थिति में ऐसे विद्यार्थियों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने के लिए पहले से स्पष्ट व्यवस्था तैयार करना है। इसके अलावा जिला स्तर पर स्कूलों की आपदा तैयारियों की आकस्मिक जांच और ऑडिट कराने का सुझाव भी दिया गया है।

अब शिक्षा मंत्रालय के फैसले का इंतजार

प्रस्ताव में आपदा से पहले तैयारी, समय पर चेतावनी और तेज एवं सुरक्षित निकासी को बच्चों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। अब इन सुझावों पर शिक्षा मंत्रालय की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्कूलों में आपदा प्रबंधन और फर्स्ट-एड ट्रेनिंग को देशभर में अनिवार्य करने का अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है।