कोलकाता, 25 सितंबर। पश्चिम बंगाल में एसआईआर (Special Intensive Revision) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच जारी विवाद के बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के समर्थन में बयान दिया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव कराने में ज्ञानेश कुमार की भूमिका का हवाला देते हुए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने की मांग की।

शमिक भट्टाचार्य ने ज्ञानेश कुमार की तारीफ की

शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता लंबे समय से स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव चाहती थी। उनके मुताबिक, मतदाता सूची से मृत और फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने तथा पात्र लोगों के मतदान अधिकार सुनिश्चित करने में ज्ञानेश कुमार की भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने त्रुटिरहित मतदाता सूची और निष्पक्ष मतदान की दिशा में काम किया। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को कम से कम पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना चाहिए।

भाजपा अकेले चुनाव लड़ने की बात

शमिक भट्टाचार्य ने आगामी चुनावों को लेकर भी भाजपा की रणनीति पर बात की। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी और किसी राजनीतिक दल के साथ समझौता नहीं करेगी। उन्होंने ‘एकला चलो’ की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव होने पर भाजपा अपने दम पर मैदान में उतरेगी।

SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद हाल में प्रकाशित Indian Express की एक जांच रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के भीतर लिए गए कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों आयुक्तों ने नए मतदाताओं के Form 6 में बदलाव, मतदाता नामों को जोड़ने-हटाने और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कुछ कदमों को ‘अनधिकृत’ और ‘अवैध’ बताया था।

विपक्ष ने उठाए सवाल

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। हालांकि, इन आरोपों और रिपोर्ट में उठाए गए सवालों को लेकर चुनाव आयोग की ओर से संबंधित जांच रिपोर्ट पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इस पूरे विवाद के बीच शमिक भट्टाचार्य का बयान राजनीतिक बहस का नया हिस्सा बन गया है। एक तरफ विपक्ष SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रहा है, वहीं भाजपा नेतृत्व ज्ञानेश कुमार के काम का बचाव कर रहा है।