हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर से होने जा रहा है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु घरों और मंदिरों में कलश स्थापना कर देवी आराधना करते हैं।
नवरात्रि के दौरान पूजा-पाठ के साथ घर की स्वच्छता और सजावट पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में घर के मुख्य द्वार को विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि इसे घर में प्रवेश का प्रमुख स्थान माना जाता है।
मुख्य द्वार पर बना सकते हैं ये शुभ चिह्न
ॐ का चिह्न
धार्मिक परंपरा में ॐ को अत्यंत पवित्र प्रतीक माना गया है। नवरात्रि के दौरान मुख्य द्वार पर हल्दी या रोली से ॐ का चिह्न बनाने की परंपरा कई घरों में देखने को मिलती है।
मान्यता है कि यह प्रतीक घर के वातावरण में सकारात्मकता बनाए रखने और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा का प्रतीक है।
स्वास्तिक का निशान
स्वास्तिक हिंदू धर्म में शुभता और मंगल का प्रमुख प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन मुख्य द्वार पर रोली, कुमकुम या हल्दी से स्वास्तिक बनाने की परंपरा भी प्रचलित है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार स्वास्तिक घर में सुख-शांति और सकारात्मक वातावरण का प्रतीक माना जाता है।
कलश का चिह्न
कलश को हिंदू धार्मिक परंपरा में समृद्धि, शुभता और पूर्णता से जोड़ा जाता है। नवरात्रि में कलश स्थापना की विशेष परंपरा है।
इसी मान्यता के आधार पर मुख्य द्वार पर कलश का प्रतीक बनाना भी शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और अन्न-धन की वृद्धि का भाव जुड़ा होता है।
लक्ष्मी जी के चरण
नवरात्रि के दौरान मुख्य द्वार पर लक्ष्मी जी के चरण बनाने की परंपरा भी कई घरों में अपनाई जाती है। इन्हें घर में देवी के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता के अनुसार चरणों की दिशा घर के अंदर की ओर होनी चाहिए, ताकि उन्हें देवी के घर में प्रवेश करने का प्रतीक माना जा सके। इसके लिए सिंदूर, रोली या अन्य पारंपरिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।
मुख्य द्वार की सफाई का भी रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं में शुभ चिह्न बनाने से पहले मुख्य द्वार की साफ-सफाई को महत्वपूर्ण माना गया है। नवरात्रि के दौरान घर के प्रवेश द्वार के आसपास गंदगी या कचरा नहीं रखने और स्थान को स्वच्छ रखने की परंपरा है।
श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार मुख्य द्वार को फूलों, रंगोली और अन्य पारंपरिक सजावटी वस्तुओं से भी सजा सकते हैं।
अस्वीकरण: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और प्रचलित ज्योतिषीय धारणाओं पर आधारित है। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में न लें। अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों में मान्यताएं एवं पूजा की परंपराएं अलग हो सकती हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने परिवार की परंपरा या विद्वान पंडित की सलाह को प्राथमिकता दें।




